Varanasi News: मलबा उठाने के लिए क्रूज का इस्तेमाल होगा। गंगा पार ले जाकर सतुआ बाबा आश्रम में मलबा रखने की योजना है। श्मशान घाट के विकास कार्य पर 36.86 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मणिकर्णिका घाट पर 18 करोड़ रुपये और हरिश्चंद्र घाट पर 16.86 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
वाराणसी के मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह स्थलों का निर्माण कार्य शुरू होने से पूर्व स्वॉयल टेस्टिंग का काम चल रहा है। इसी आधार पर निर्माण की ऊंचाई तय होगी। फिलहाल जी प्लस वन के हिसाब से निर्माण होगा, लेकिन भविष्य में जरूरत को ध्यान में रखकर पाइलिंग की जाएगी।
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काम करने वाले अधिकारियों के अनुसार गंगा किनारे की मिट्टी दलदली होती है। ऐसी स्थिति में पाइलिंग की गहराई अधिक करनी पड़ती है। यहां पर तकरीबन 15 से 20 मीटर नीचे तक पाइलिंग की जाएगी। जहां पर सख्त मिट्टी मिलेगी वहां तक पाइलिंग की जाएगी ताकि बाढ़ के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत न आने पाए। फिलहाल घाटों पर रखे मलबे को हटाया जा रहा है ताकि काम के लिए जगह मिल सके।
पाइलिंग का काम शुक्रवार से शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए बाहर से इंजीनियर भी बुलाए गए हैं। जिनकी देखरेख में पाइलिंग कराई जाएगी। ताकि सुरक्षा में किसी प्रकार की कोताही न होने पाए। यहां 25 मीटर ऊंची चिमनी भी बनाई जाएगी ताकि चिता की राख आसपास के घरों में न जाए।
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मणिकर्णिका पर 29350 वर्गफीट और हरिश्चंद्र पर 13250 वर्गफीट पर काम होगा। यहां शवों के स्नान के लिए पवित्र जलकुंड, अपशिष्ट ट्रालियां, मुंडन क्षेत्र होंगे। चारों तरफ से कवर दाह संस्कार क्षेत्र में पांच बर्थ, सर्विस एरिया, अपशिष्ट संग्रह की व्यवस्था, सीढिय़ों, वेटिंग एरिया, भूतल पर पंजीकरण कक्ष, खुले में दाह संस्कार केलिए 19 प्लेटफार्म, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षा कक्ष, दो सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। यहां पूरा निर्माण कार्य चुनार और जयपुर के पत्थरों से किया जाएगा।