बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग के प्रो. ओमशंकर के अनुसार हर दिन ओपीडी में औसतन 300 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें बेचैनी, अधिक पसीना आना और दिल की धड़कन बढ़ने की समस्या लेकर लोग आते हैं। जांच के बाद लगभग 25 मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि होती है।
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चौंकाने वाली बात यह है कि नए मरीजों में हर तीसरे की उम्र 40 साल से कम है। दो साल पहले तक 50 साल से अधिक उम्र वाले मरीज अधिक मिलते थे, अब उम्र कम हो गई है। इसके अलावा हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में भी 50 साल से कम उम्र के मरीज अधिक रहते हैं।
आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि सामान्य मौसम की तुलना में ठंड में नसों में खून का थक्का जमने की समस्या बढ़ जाती है। इन दिनों ओपीडी में मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ गई है। सामान्य मौसम में 15 से 20 मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि होती थी, अब यह संख्या 35 तक पहुंच गई है।
आईएमएस बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. आरएन चौरसिया का कहना है कि हर साल जनवरी से अक्तूबर तक ओपीडी में औसतन 15 मरीज ब्रेन स्ट्रोक के आते हैं, लेकिन ठंड के चार महीने (नवंबर से फरवरी) में यह संख्या दोगुनी यानी 30 तक पहुंच जाती है। पिछले दो महीनों में विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह करीब 120 मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण देखे गए। ऐसे मरीजों को दवा के साथ बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं।
प्रो. विजयनाथ मिश्रा का कहना है कि ठंड के मौसम में नसों के सिकुड़ने की वजह से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है। खून का थक्का बनने की वजह से रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। ओपीडी में 20 ऐसे मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हो रही है, जिनमें पहले से शुगर और बीपी की समस्या है।