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Health: 40 से कम आयु वाला हर तीसरा व्यक्ति दिल का रोगी, बचाव के लिए इन चार बातों का जरूर रखें ध्यान

Mon, 19 Jan 2026 10:35 AM IST
Pragati Chand रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग के ओपीडी में हर सप्ताह 100 नए हृदय रोग से ग्रसित मरीज आ रहे हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि 40 से कम आयु वाला हर तीसरा व्यक्ति दिल का रोगी मिल रहा है। 
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हृदय रोग - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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ठंड के मौसम में दिल और दिमाग के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह 100 नए मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार इनमें हर तीसरे व्यक्ति की उम्र 40 साल से कम है। इसके अलावा न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में भी ब्रेन स्ट्रोक के 120 नए मरीज आ रहे हैं। पिछले दो महीनों में इसी तरह के मरीज लगातार देखे जा रहे हैं।

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डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के चार महीने (नवंबर से फरवरी तक) में नसों में खून का प्रवाह सामान्य गति से नहीं होने के कारण दिल और दिमाग से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। तेजी से बदल रही जीवनशैली, दिनचर्या का बिगड़ना और खानपान में अनुचितता के कारण अब कम उम्र में हृदय और ब्रेन संबंधी बीमारियां हो रही हैं। शुक्रवार को ईसीजी, टूडी इको और टीएमटी जांच करवाने वालों की भीड़ जांच केंद्र के बाहर भी देखी गई।

दिल की धड़कन तेज होने, बेचैनी की समस्या लेकर आते हैं मरीज

बीएचयू अस्पताल के हृदय रोग विभाग के प्रो. ओमशंकर के अनुसार हर दिन ओपीडी में औसतन 300 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें बेचैनी, अधिक पसीना आना और दिल की धड़कन बढ़ने की समस्या लेकर लोग आते हैं। जांच के बाद लगभग 25 मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि होती है। 

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चौंकाने वाली बात यह है कि नए मरीजों में हर तीसरे की उम्र 40 साल से कम है। दो साल पहले तक 50 साल से अधिक उम्र वाले मरीज अधिक मिलते थे, अब उम्र कम हो गई है। इसके अलावा हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में भी 50 साल से कम उम्र के मरीज अधिक रहते हैं। 

आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि सामान्य मौसम की तुलना में ठंड में नसों में खून का थक्का जमने की समस्या बढ़ जाती है। इन दिनों ओपीडी में मरीजों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ गई है। सामान्य मौसम में 15 से 20 मरीजों में हृदय रोग की पुष्टि होती थी, अब यह संख्या 35 तक पहुंच गई है।

चार महीने में ब्रेन स्ट्रोक वाले मरीजों की संख्या दोगुनी 

आईएमएस बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. आरएन चौरसिया का कहना है कि हर साल जनवरी से अक्तूबर तक ओपीडी में औसतन 15 मरीज ब्रेन स्ट्रोक के आते हैं, लेकिन ठंड के चार महीने (नवंबर से फरवरी) में यह संख्या दोगुनी यानी 30 तक पहुंच जाती है। पिछले दो महीनों में विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह करीब 120 मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण देखे गए। ऐसे मरीजों को दवा के साथ बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। 

प्रो. विजयनाथ मिश्रा का कहना है कि ठंड के मौसम में नसों के सिकुड़ने की वजह से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है। खून का थक्का बनने की वजह से रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। ओपीडी में 20 ऐसे मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक की पुष्टि हो रही है, जिनमें पहले से शुगर और बीपी की समस्या है।
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सावधानी बरतनी चाहिए
  1. सुबह 7 बजे तक टहलने से बचें। इस समय हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है।
  2. बाहर जाकर व्यायाम करने के बजाय घर में ही योग करें।
  3. यदि पहले से बीपी या शुगर की समस्या है, तो अधिक सतर्कता बरतें।
  4. जरूरत के अनुसार शरीर को गर्म कपड़ों से ढककर रखें, जिससे खून का प्रवाह नसों में निरंतर बना रहे।
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