ज्ञानवापी प्रकरण के सबसे पुराने मूलवाद 1991 के मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता अनुष्का तिवारी की तरफ से अदालत में बहस जारी रही। यह वाद स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर से संबंधित है। इसमें विजय शंकर रस्तोगी वाद मित्र की भूमिका में हैं। मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड भी पक्षकार हैं। अब 23 सितंबर को बहस होगी।
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 2024 के आदेश का हवाला दिया गया और कहा गया कि इस मामले में अग्रिम कार्यवाही या कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से आवेदिका अनुष्का तिवारी के प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल की गई।
अनुष्का ने आपत्ति की प्रति प्राप्त कर ली। साथ ही अदालत से कहा कि प्रति उत्तर अगली तारीख पर दाखिल किया जाएगा। बहस के दौरान ने याचिकाकर्ता ने वादमित्र की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वादमित्र ने षड्यंत्र के तहत न्यायालय से नियुक्ति प्राप्त की है। यह वाद उनके आराध्य से संबंधित है जिन्हें कानून की दृष्टि से शाश्वत नाबालिग माना जाता है।
उनका कहना था कि यह हिंदू जनमानस का वाद है। किसी व्यक्ति का निजी वाद नहीं। दूसरी ओर वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने बहस के दौरान कहा कि यह वाद प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट, 1991 से बाधित नहीं है।