इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में पदोन्नति संबंधी विवाद पर दायर याचिका की सुनवाई 10 अगस्त तक स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ में डॉ. सुशील कुमार दुबे की ओर से विश्वविद्यालय के 21 फरवरी 2026 के अध्यादेश को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि एनसीआईएसएम एक्ट-2020 और वर्ष 2022 के नियमों के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर बनने के लिए पांच वर्ष और प्रोफेसर बनने के लिए 10 वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य है। जबकि बीएचयू का अध्यादेश डीएसीपी योजना-2008 का हवाला देकर दो वर्ष की सेवा में ही पदोन्नति की अनुमति देता है। विश्वविद्यालय ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने कहा कि इस बीच यदि कोई पदोन्नति होती है तो उसका अंतिम परिणाम याचिका के फैसले के अधीन रहेगा। ब्यूरो