वाराणसी। मछुआरा समाज का सबसे पिछड़ा तबका है। सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से यह समाज किसी भी दलित जाति से अधिक पिछड़ा है। आरक्षण निषाद समाज का अधिकार है और हम उसे लेकर रहेंगे। इसके लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी। अखिल भारतीय मछुआ महासंघ 29 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहा है। यह बात प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री शंखलाल माझी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कही। वे सर्किट हाउस में मछुआरा समाज के लोगोें के साथ बैठक करके आंदोलन को सफल बनाने की अपील करने आए थे। बैठक में सपा के समर्थन में नारे लगने पर उनको विरोध भी झेलना पड़ा।
मांझी ने कहा कि 66 जातियों को दलित जाति में शुमार किया गया है। उसमें मछुआ समाज की मझवार, गोंड, बेलदार आदि उपजातियां भी हैं, लेकिन संपूर्ण मछुआ समाज को राजनीतिक कारणों से अनुसूचित जाति का दर्जा देने से सरकारें बचती रही हैं। यह सूबे की दो करोड़ की आबादी के साथ अन्याय है। आरक्षण की हम भीख नहीं मांग रहे हैं, यह हमारा अधिकार है। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया मुलायम
सिंह यादव ने इसका प्रस्ताव 2003 में भेजा था और अब अखिलेश यादव की सरकार ने भेजा, जिसे केंद्र सरकार ने निरस्त कर दिया। हम केंद्र सरकार पर इसके लिए दबाव बनाएंगे कि वे हमारे समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करे। उन्होंने कहा कि पूरे पूर्वांचल में दौरा करके वे समाज के लोगों को एकजुट करने में लगे हैं ताकि दिल्ली में ताकत दिखाई जा सके।
बैठक में हुआ हंगामा
सर्किट हाउस में मांझी समाझ की बैठक में राकेश बिंद ने समाज की बैठक सपा के समर्थन में नारे लगाने पर आपत्ति जताई जबकि वीरेंद्र निषाद ने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की तारीफ करते हुए कहा कि सपा की सरकार ने भी निषाद समाज के किसी व्यक्ति को कैबिनेट मंत्री बनाने का साहस नहीं दिखाया। इस पर बैठक में कुछ देर तक माहौल गर्म हो गया था। विश्वंभर प्रसाद निषाद ने भी इसका प्रतिवाद किया। बैठक में सपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, राजेंद्र त्रिवेदी भी मौजूद रहे।