संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र पर न डॉक्टर हैं न दवाएं। पिछले पांच साल से स्वास्थ्य केंद्र बिना चिकित्सक ही चल रहा है। नियुक्ति को लेकर छात्रों ने कई बार मांग की, लेकिन कोई पहल नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य केंद्र पर एक एलोपैथ, एक आयुर्वेद डॉक्टर, दो फार्मासिस्ट, चार परिचारक व एक एक्सरे टेक्नीशियन के पद स्वीकृत थे। यही नहीं एलोपैथ व आयुर्वेद में दवा के मद में सालाना 3.50 लाख रुपये बजट का भी प्रावधान किया गया है। 2010 में एलोपैथ डॉक्टर अशोक दास व 2013 में आयुर्वेद डॉक्टर वैद्य गंगेश्वर सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्त होने के बाद वैद्य गंगेश्वर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने संविदा पर नियुक्त कर लिया। 2016-17 के बाद संविदा नवीकरण नहीं किया गया। ऐेसे में करीब पांच वर्ष से बगैर डाक्टर स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। दो वर्ष पहले तक राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय व चिकित्सालय के डॉक्टर को दो घंटे के लिए बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कोविड काल में व्यवस्था बदल गई। डॉक्टर का पद रिक्त होने के कारण दवा भी नहीं खरीदी जा रही है। केंद्र पर बंद पड़े-पड़े एक्सरे मशीन भी अब खराब हो चुकी है। वर्तमान में स्वास्थ्य केंद्र पर दो फार्मासिस्ट व दो परिचारक तैनात हैं। स्वास्थ्य केंद्र का ताला खोलना और शाम को बंद कराना ही फार्मासिस्टों का काम रह गया है। छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर पांडेय ने बताया कि नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल संविदा पर ही डॉक्टरों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है।