बीएचयू में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी सोमवार को अपनी मांगों को लेकर मुखर हो उठे। विश्वविद्यालय निर्माण विभाग (यूडब्ल्यूडी) के डेढ़ सौ से अधिक कर्मचारियों ने विश्वनाथ मंदिर पर धरना प्रदर्शन कर स्थायी नौकरी, पेंशन और चिकित्सा सुविधा के लिए आवाज बुलंद की। उधर, बीएचयू प्रशासन ने उनके धरने को अनुचित करार दिया है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि वे बीएचयू में 25-30 साल से काम कर रहे हैं लेकिन अब तक उनकी स्थायी नियुक्ति नहीं की गई। यही नहीं, उन्हें न तो पेंशन दी जा रही और न चिकित्सा सुविधा। कहा कि दो महीने काम कराकर एक महीने के लिए बैठा दिया जाता है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। बताया कि महीने में सिर्फ 20 दिन काम दिया जा रहा है।
कई बार कुलसचिव के समक्ष अपनी समस्याएं रख चुके हैं लेकिन कोई कदम नहीं उठाए गए। उधर, धरने की सूचना पर यूडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिशासी अभियंता प्रो. पीकेएस दीक्षित मौके पर पहुंचे। उन्होंने समस्या समाधान के लिए 15 दिन का समय मांगा लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया। विवि प्रशासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए अधिशासी अभियंता जीके सिंह को इसका प्रभार दे दिया।
बीएचयू एपीआरओ डॉ. राजेश सिंह का कहना है कि यूडब्ल्यूडी में समय-समय पर अल्पकाल के लिए भर्तियां की जाती रही हैं। ये नियुक्तियां केवल दैनिक वेतन पर निर्धारित समय के लिए होती हैं। इसका अभिप्राय स्थायी नियुक्ति देना कतई नहीं है। हालांकि विवि प्रशासन ने इस संबंध में एक सम्यक प्रस्ताव यूजीसी को भेजा है। उन्होंने कहा कि परिसर में धरना देना अनुशासनहीनता और नियमों का उल्लंघन है।