नता दल (यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने शुक्रवार की शाम काशी को स्मार्ट सिटी का दर्जा देने को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि काशी को स्मार्ट सिटी न बनाकर उसे मूल रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। नाले में तब्दील हो चुकी असि नदी की दुर्दशा पर भी उन्होंने चिंता जताई। कहा कि जब मैं काशी में छात्र राजनीति में था तब असि नदी को प्रणाम करने के बाद ही बीएचयू में प्रवेश करता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ गंगा को बचा लें, काशी स्मार्ट हो जाएगी। तुलसी घाट पर महीने भर से ललित कला अकादमी की ओर से चल रही कार्यशाला में 500 से अधिक चित्रों, मूर्तियों को बनाने वाले 15 कलाकारों को पुरस्कृत करने के बाद उन्होंने यह बात कही।
जद (यू) नेता ने कहा कि नोएडा, दिल्ली, मुंबई सभी स्मार्ट सिटी हैं लेकिन काशी सिर्फ एक शहर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह इकलौता ऐसा शहर है जहां एक साथ कई सदियां नजर आती हैं। पांचवीं शताब्दी के भी कुंड मिलेंगे और 10वीं-12वीं शताब्दी के मंदिर भी दर्शनीय है। ऐसे ऐतिहासिक शहर से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। कई सदियां जिस शहर में रहती हों उसे विकास के नाम पर नष्ट करने की बजाए उसे मूल रूप में बचाना चाहिए। छात्र राजनीति में जब मैं था तो असि नदी को पहले प्रणाम करता था, तभी बीएचयू जाता था। पीएम से मेरा अनुरोध है कि गंगा को बचा लें, काशी स्मार्ट हो जाएगी। उन्होंने अस्सी घाट को भी देखा। कहा कि काशी से लगता है गंगा जी रूठ गई हैं। घाटों को छोड़ रही हैं। गंगा के लिए काम होना चाहिए। संचालन प्रो. वीएन मिश्र ने किया। एकेडमी के बारे में डॉ. एस प्रणाम सिंह ने जानकारी दी। संकट मोचन फाउंडेशन की ओर से 15 चित्रकारों को पुरस्कृत किया गया।