वाराणसी। पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद जहां पछुआ हवाओं के चलने से बनारस ठिठुरने लगा है, वहीं शाम होते ही कोहरे की धुंध से राह चलना भी मुश्किल होने लगा है। मंगलवार की रात आठ बजे के बाद काशी के आसमान पर कोहरे की चादर तन गई। दृश्यता लगभग शून्य होने से वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई और लोग सड़कों पर किसी तरह मंजिल की ओर बढ़े। हालांकि न्यूनतम तापमान में चौबीस घंटे के दौरान चार डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई। लेकिन इससे लोगों को गलन में कोई खास राहत महसूस नहीं हुई। मंगलवार को अधिकतम तापमान 17.4 और न्यूनतम 7.5 डिग्री सेल्सियस रहा।
भूमध्य सागर से पश्चिमी विक्षोभ की एक ब्रांच बुधवार को जम्मू पहुंचेगी। अगले 48 घंटों में इसके हिमाचल, दिल्ली, उत्तराखंड होते हुए यूपी में प्रवेश करने के आसार हैं। इसके बाद ही गलन से राहत मिल सकेगी। बीएचयू की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा इकाई के कोआर्डिनेटर डॉ. आरएस सिंह ने बताया कि जब तक पूर्वांचल में विक्षोभ की हवा नहीं पहुंचेगी, पाला पड़ता रहेगा। बीएचयू के मौसम परीक्षणशाला में मंगलवार का अधिकतम तापमान 17.4 और न्यूनतम 7.5 रिकार्ड किया गया। गलन के चलते काशी में गंगा घाटों से लेकर फुटपाथों तक लोगों की दिन भर कंपकंपी छूटती रही। रात को कोहरे से लोगों को सड़कों पर आवागमन में भी काफी दिक्कत हुई।