यह है आरोप
आरोप है कि जब यमुना प्राधिकरण हाथरस की जमीन को विकसित करने के लिए खरीद रहा था, तब प्राधिकरण के अधिकारियों ने मिलीभगत कर अधिग्रहण से पहले अपने परिचितों और रिश्तेदारों के माध्यम से वहां की जमीन किसानों से खरीदी गई थी। इसमें तत्कालीन तहसीलदार अजीत परेश और ओएसडी वीरपाल सिंह की भूमिका थी।
14.5 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई थी : पुलिस की जांच में पता चला कि जिस वक्त यमुना प्राधिकरण हाथरस में जमीन का अधिग्रहण कर रहा था उस वक्त योजना के मुताबिक 5 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता थी, लेकिन आरोपियों ने अधिक कमाई के लालच में पहले ही 14.5 हेक्टेयर जमीन किसानों से औने-पौने दाम में खरीद ली थी।
प्राधिकरण के अधिकारी व बिल्डर कंपनी में सांठगांठ
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में प्राधिकरण के अधिकारी व बिल्डर कंपनी के लोग मिले थे। इससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। मामले की जांच धीरे-धीरे धीमी हो गई थी। बाद में मामले की जांच एसीपी प्रथम प्रवीण सिंह को दी गई थी। एसीपी की विवेचना के बाद पुलिस टीम ने अजीत परेश व वीरपाल सिंह के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया है।
मथुरा के जमीन घोटाले में भी आया था नाम
हाथरस जमीन घोटाले से पहले इसी तरह का घोटाला मथुरा में भी हुआ था। वहां भी इसी तर्ज पर अधिकारियों के करीबी लोगों ने 57 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। इस मामले में भी हाथरस जमीन घोटाले के आरोपी शामिल रहे हैं। इस मामले की भी जांच की जा रही है। पुलिस की टीम इस तरह के अन्य मामलों में हुई अनियमितता की जांच कर रही है।