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शरद पूर्णिमा की रात काशी में अमृत वर्षा

Tue, 27 Oct 2015 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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 शरद पूर्णिमा का चांद सोमवार की रात अमृत की बूंदों के रूप में खास तोहफा लेकर उगा। अश्विन मास की इस पूर्णिमा का लोगों को बेसब्री से इंतजार था।
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मान्यता है कि इस रात 16 कलाओं से परिपूर्ण चांद ओस कणों के रूप में अमृत वर्षा करता है। इसी रात द्वापर में कभी कृष्ण ने महारास रचाया था।
अमृत की बूंदों के पान के लिए लोगों ने खीर बनाकर थालियां छतों पर रखीं। संतों ने दमा की दवा वितरित की और विद्वानों का सम्मान भी हुआ।
मान्यता है कि च्यवन ऋषि को अश्विनी कुमारों ने आरोग्य का पाठ और औषधि का ज्ञान इसी पूर्णिमा को ही दिया था। यही ज्ञान हजारों साल बाद परंपरा के रूप में संचित है।
 शरद पूर्णिमा पर सोमवार को काशी के आश्रमों में मेले जैसा मंजर नजर आया। गड़वा घाट आश्रम में दमा की दवा लेने के लिए पूर्वांचल के अलावा देश के अलग-अलग हिस्से से लोग पहुंचे।
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उधर, रवींद्रपुरी स्थित बाबा कीनाराम आश्रम परिसर में भी दमा की दवा का वितरण किया जाएगा। रवींद्रपुरी एक्सटेंशन में स्थित वेदपारायण केंद्र में सुबह सात बजे महात्रिपुर सुंदरी राज राजेश्वरी की श्रीचक्र आराधना शुरू हुई।
 शाम को चार विद्वानों को सम्मानित किया गया। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष और केंद्रम के संस्थापक आचार्य पं. अशोक द्विवेदी की मौजूदगी में मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने अनुष्ठान में हिस्सा लिया।
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जिन चार विद्वानों को सम्मानित किया गया उनमें आचार्य पं. लक्ष्मीकांत दीक्षित, प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, डॉ. रमाकांत पांडेय और पं. नारायण उपाध्याय के नाम शामिल हैं।
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