बाबा विश्वनाथ की नगरी सांवरे सलोने नटवर नागर श्रीकृष्ण के रंग में रंगी नजर आई। जन्मोत्सव का उल्लास जन-जन पर नजर आया। शिव भक्त ही नहीं काशीपुराधिपति भी मनमोहन के जन्म की प्रतीक्षा में आधी रात तक जागते रहे। महंत आवास पर हर का हरि रूप में हुए शृंगार ने शैव व वैष्णव के एकाकार स्वरूप के दर्शन भी कराए। श्री काशी विश्वनाथ धाम से लेकर शहर के मठ-मंदिरों और आश्रमों में भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकी सजाई गई।
सावन में भी रात्रि 11 बजे शयन करने वाले काशीपुराधिपति भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की प्रतीक्षा में मध्यरात्रि तक जागते रहे। बाबा विश्वनाथ के मंदिर परिक्षेत्र में स्थित सत्यनारायण मंदिर में प्राकट्योत्सव मनाया गया। झांकी दर्शन के लिए शाम से ही भक्तों की भीड़ पहुंचने लगी थी। मंदिर परिसर को फूल और पत्तियों से सजाया गया था। पुजारी ने रात्रि 12 बजे भगवान के जन्म का विधान पूर्ण कराया। पंचामृत स्नान के बाद, नूतन वस्त्र, आभूषण से बाल विग्रह का शृंगार हुआ। माखन और मिश्री का भोग लगाकर बाल कन्हैया की आरती उतारी गई। बाबा के मंदिर के कपाट बंद हुए और कन्हैया को भी शयन कराया गया। अक्षयवट हनुमान मंदिर के महंत परिवार के सदस्यों ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया। दुर्गाकुंड स्थित राधेकृष्ण मंदिर में ज्ञानेश्वर दुबे ने प्रभु की आरती उतारी।
मां अन्नपूर्णा के दरबार में गूंजा बाल गोपाल का जयकारा
वाराणसी। माता अन्नपूर्णा के दरबार में भी श्रीकृष्णजन्मोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। देवी के दरबार में बालगोपाल के नाम का जयकारा गूंजता रहा। मंदिर के परिसर को गेंदे के फूल की मालाओं और अशोक की पत्तियों से सजाया गया। सुगंधित पुष्पों से भगवान श्रीकृष्ण का झूला बनाया गया। संध्या से लेकर मध्यरात्रि में जन्म से पूर्व तक भजनों की प्रस्तुतियां चलती रहीं। मध्यरात्रि में लग्ना अनुसार महंत शंकरपुरी महाराज ने खीरे से भगवान के जन्म का विधान पूरा कराया। मंदिर में दर्शन करने आए बच्चों को प्रसाद के रूप में खिलौने बांटे गए तो बड़ों को फल और हलुआ का प्रसाद मिला।
हर बने हरि ने मनाई जन्माष्टमी
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास पर प्रभु कान्हा की भव्य झांकी सजाई गई। बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा को श्रीहरि का श्रीकृष्ण स्वरूप दिया गया। डॉ. तिवारी ने बताया कि महंत परिवार की परंपरा अनुसार हर-हरि शृंगार कर झूलनोत्सव मनाया गया। टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास पर सायंकाल विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। डॉ. कुलपति तिवारी ने हर (बाबा) बने हरि की आरती उतारी। भक्ति संगीत के कार्यक्रम में आराधना सिंह एवं पुनीत पागल बाबा ने भगवान श्रीकृष्ण के भजन गाए। रात्रि 12 बजे आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
धर्मसंघ में 21 क्विंटल मेवे के हलुआ का लगा भोग
श्री धर्मसंघ शिक्षा मंडल दुर्गाकुंड में भगवान श्रीकृष्ण की झांकी सजाई गई। दो दिवसीय कृष्ण जन्मोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को सायंकाल दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। शाम छह बजे से मध्यरात्रि तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इसके अंतर्गत नृत्य ,संगीत ,सोहर के साथ ही कृष्ण लीला पर आधारित नाट्य का मंचन भी हुआ। भगवान को 21 क्विंटल मेवा युक्त हलवा का खास भोग लगाया गया। इसके अतिरिक्त 101 प्रकार के व्यंजन भगवान को भोग स्वरूप अर्पित किए। धर्मसंघ पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी के सानिध्य में जन्मोत्सव विधान पूर्वक किया गया। पं. जगजीतन पांडेय ने दिव्य स्वरूप की भव्य आरती उतारी।
महा महोत्सव के दूसरे दिन साकार हुआ ब्रजधाम
वाराणसी। हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी के तीन दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा महोत्सव के दूसरे दिन माहेश्वरी भवन में भक्तों को ब्रजधाम के दर्शन हुए। भक्तगण भगवान की भक्ति में ऐसे भाव-विभोर हुए कि बस हर जबान पर राधाकृष्ण का जप ही चल रहा था। राधा गोविंद की सेवा में गुलाब प्रभु और प्रियंका माता द्वारा भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं। भगवान श्रीविग्रह राधागोविंद,जगन्नाथ, वलदेव व सुभद्रा महारानी के श्रीविग्रहों का मनोहारी शृंगार किया गया। इसके उपरांत नित्यानंद प्रभु ने प्रवचन किया। रात्रि साढ़े दस बजे जन्म के विधान आरंभ हुए। भगवान के लड्डू गोपाल स्वरूप का महाभिषेक किया गया। प्रियंका केसरी, कृष्णमयी देवी दासी , रजनी केसरी, पदमिनी पाठक, प्रीति मिश्रा, रागिनी द्विवेदी, श्वेता द्विवेदी, छाया मिश्र,जया वर्मा, अनिता चौरसिया, वंदना जायसवाल ने सहभागिता की। जन्म के उपरांत मध्यरात्रि में भगवान को 108 से अधिक व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। ठीक रात्रि 12 बजे भगवान की महाआरती संजय प्रभु ने उतारी।
इस्कॉन में भिलाई के कलाकारों का प्रदर्शन
दुर्गाकुंड मार्ग स्थित इस्कॉन परिसर में दो दिवसीय श्रीकृष्णजन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ मंगला आरती से हुआ। कलाकारों ने गायन, वादन और नर्तन पर आधारित विविध प्रस्तुतियां दीं। भक्तिमय प्रस्तुतियों का क्रम देर रात चलता रहा। एक तरफ मंदिर में श्रीराधा-कृष्ण के मोहक शृंगार की झांकी के दर्शन कर भक्तगण निहाल हो रहे थे तो दूसरी ओर मंदिर से बाहर एक झूले पर भगवान के लड्डू गोपाल स्वरूप को प्रतिष्ठित किया गया था। भक्त प्रभु को झूला झुला रहे थे।