वाराणसी। देवनाथपुरा स्थित आंध्रा आश्रम के काशी कैलाश भवन में फंदा लगाकर जान देने से पहले आंध्र प्रदेश निवासी दंपती और उनके दोनों बेटों ने तारपीन का तेल पिया था। तारपीन का तेल पीने के बाद मौत नहीं हुई तब उन्होंने फंदा लगाया। दशाश्वमेध थाने के पुलिसकर्मियों ने चारों लोगों का शव फंदे से नीचे से उतारा तो उनके मुंह से तारपीन के तेल की गंध आई। कमरे से भी एक बोतल में तारपीन का तेल बरामद हुआ।
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इसके अलावा दंपती के एक बेटे की हाथ की नस कटी हुई थी। इसे लेकर पुलिस ने आशंका जताई कि दंपती और एक बेटे ने पहले फंदा लगाया। तीनों के बाद दूसरे बेटे ने हाथ की नस काट कर फंदा लगाया। पुलिस को मौके से एक ब्लेड भी मिली है। काशी कैलाश भवन का एस-6 कमरा सील करने के साथ ही पुलिस ने तारपीन के तेल वाली बोतल और ब्लेड कब्जे में लेकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा है।
आंध्र प्रदेश निवासी कोंडा बाबू का बड़ा बेटा राजेश ऑटोमोबाइल की दुकान में काम करता था। सुसाइड नोट के अनुसार उसने अपनी दुकान से संबंधित तीन लोगों से लगभग छह लाख रुपये उधार लिया था। राजेश के अनुसार वह उधार लिया हुआ पैसा लौटा दिया था। जबकि, उसे उधार देने वाले कहते थे कि अभी उनका पैसा उस पर बकाया है। वह तीनों लोग पूरे परिवार को धमकाते थे कि कहीं भी भाग कर जाओ, पैसा तो वसूल ही लेंगे। पैसे के लिए तीनों लोगों द्वारा उसे लगातार धमकाया और परेशान किया जा रहा था। इससे आजिज आकर राजेश अपने मां-बाप और भाई के साथ दो माह पहले घर छोड़ दिया था। चारों लोग अपने घर से तमिलनाडु, हरिद्वार और कोलकाता होते हुए तीन दिसंबर को काशी पहुंचे। यहां चारों ने दर्शन-पूजन और गंगा स्नान किया। इसके बाद फंदा लगाकर जान दे दी।
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वाराणसी में ही खरीदी रस्सी और तारपीन का तेल दंपती और उनके दोनों बेटों ने फंदा लगाने के लिए नायलॉन की नई रस्सी बनारस में ही खरीदी। तारपीन का तेल भी उन्होंने यहीं खरीदा। काशी कैलाश भवन के कमरे का तीन दिसंबर से सात दिसंबर की सुबह तक के किराये का भुगतान राजेश ने बुधवार की दोपहर ही कर दिया था। भवन के मैनेजर ने बताया कि अन्य श्रद्धालुओं की भांति दंपती और उनके दोनों बेटे भी सामान्य तरीके से रह रहे थे। आंध्रा आश्रम में मिलने वाला नि:शुल्क भोजन भी चारों लोग सामान्य क्रम में ही कर रहे थे। आईडी प्रूफ के रूप में राजेश ने अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी दी थी। उनकी गतिविधि से रत्तीभर भी शंका नहीं हुई थी कि वह ऐसा आत्मघाती कदम उठाएंगे। - चार्जर और हेडफोन मिला, लेकिन मोबाइल नहीं दंपती और उनके दोनों बेटे जिस कमरे में ठहरे हुए थे वहां से स्मार्ट फोन का हेडफोन और चार्जर मिला। मगर, काफी खोजबीन के बाद भी पुलिस को मोबाइल नहीं मिला। राजेश ने जो मोबाइल नंबर काशी कैलाश भवन के आगंतुक रजिस्टर में दर्ज कराया था उस पर पुलिस फोन कर रही थी तो घंटी नहीं जा रही थी। इसे लेकर पुलिस खासी परेशान रही। पुलिस के अनुसार हो सकता है कि आत्महत्या करने से पहले मोबाइल स्विच ऑफ कर चारों ने कहीं फेंक दिया हो।
सामूहिक आत्महत्या के बाद श्रद्धालुओं ने छोड़े कमरे काशी कैलाश भवन के भूतल और अन्य दो तल में 30 कमरे हैं। दंपती और उनके दोनों बेटों के आत्महत्या का प्रकरण सार्वजनिक होने के बाद काशी कैलाश भवन में ठहरे हुए अधिकतर दक्षिण भारतीय श्रद्धालु अपना कमरा खाली कर अन्यत्र शिफ्ट हो गए। दक्षिण भारतीय श्रद्धालु दंपती और उनके दोनों बेटों के आत्मघाती कदम से अवाक थे।
पोस्टमार्टम के लिए परिजनों के आने का करेंगे इंतजार एसीपी दशाश्वमेध अवधेश कुमार पांडेय ने बताया कि दंपती और उनके दोनों बेटों की आत्महत्या के संबंध में उनके घर से संबंधित स्थानीय थाने की पुलिस से संपर्क किया गया है। पोस्टमार्टम के लिए उनके परिजनों के आने का इंतजार किया जाएगा। यदि परिजन नहीं आएंगे तो पोस्टमार्टम करा कर पुलिस चारों शव की अंत्येष्टि कराएगी। प्रकरण से संबंधित मुकदमा दशाश्वमेध थाने में दर्ज कराया जाएगा। - कभी मोक्ष तो कभी निजी कारणों से जान देते रहते हैं दक्षिण भारतीय श्रद्धालु काशी में दक्षिण भारतीय श्रद्धालु कभी मोक्ष के लिए तो कभी अन्य निजी कारणों की वजह से जान देते ही रहते हैं। इससे पहले 21 सितंबर की रात गणेश महाल स्थित एक गेस्ट हाउस में बंगलूरु निवासी बीएच कृष्णमूर्ति ने फंदा लगाकर जान दे दी थी। 18 अगस्त को वाराणसी आए तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी रेवांथा मोहनराज और उनकी रिश्ते की चचेरी बहन श्रीसीजे शिवाला स्थित एक होटल के कमरे में मृत मिले थे। इससे पहले भी इसी तरह के प्रकरण थोड़े-थोड़ अंतराल पर सामने आते रहे हैं।