वाराणसी कचहरी परिसर में हिंदू पक्ष की महिलाएं और उनके अधिवक्ता
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18 अगस्त 2021 को दिल्ली की राखी सिंह और वाराणसी की सीता देवी, रेखा पाठक, मंजू व्यास व लक्ष्मी देवी ने मां शृंगार गौरी और ज्ञानवापी स्थित अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों की नियमित पूजा-अर्चना की मांग लेकर सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अप्रैल 2022 में सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में एडवोकेट कमिश्नर द्वारा कमीशन की कार्रवाई का आदेश दिया।
16 मई 2022 को हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी स्थित वजूखाने में शिवलिंग मिला है। इसके बाद अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई कि इस मामले में सिविल कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है। मसाजिद कमेटी के प्रार्थना पत्र पर सुप्रीम कोर्ट ने वाराणसी के जिला जज की अदालत को सुनवाई का आदेश दिया था।
ज्ञानवापी मामले में वादी महिलाएं कोर्ट में जाती हुईं
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मां श्रृंगार गौरी संबंधी पांच महिलाओं की याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं है, इसे लेकर जिला जज की अदालत ने 21 तारीखों पर दोनों पक्ष की दलीलें सुनी थी। 24 अगस्त 2022 को सुनवाई पूरी हुई थी। 12 सितंबर 2022 को 62 लोगों की मौजूदगी में अदालत ने अपना आदेश सुनाया था। अक्तूबर 2022 में मसाजिद कमेटी ने जिला जज के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी। 23 दिसंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।
ज्ञानवापी विवाद से जुड़े एक ही प्रकृति के सात मुकदमों की सुनवाई एकसाथ सात जुलाई को जिला जज की अदालत में होगी। इस मामले में जिला जज की अदालत ने ही फैसला सुनाया था। जिला जज की अदालत ने बीते 23 मई को फैसला सुनाया था। सभी मुकदमों को राखी सिंह के मुख्य वाद के साथ ही जोड़ दिया था। अब सुनवाई की अगली तिथि तय हुई है।
इस मामले में मां श्रृंगार गौरी के मूल वाद के अलावा अधिवक्ता हरि शंकर जैन व रंजना अग्निहोत्री, महाराष्ट्र निवासी सुरेश चव्हाण, शीतला माता मंदिर के महंत पंडित शिव प्रसाद पांडेय, मीरघाट निवासी सितेंद्र चौधरी व अन्य, लखनऊ निवासी सत्यम त्रिपाठी व पवन पाठक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व अन्य और विश्व वैदिक सनातन संघ की अंतरराष्ट्रीय महामंत्री किरन सिंह विसेन का वाद शामिल हैं।
हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है।
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ज्ञानवापी में शिवलिंग जैसी आकृति की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक सर्वेक्षण से संबंधित मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में छह जुलाई को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है। अब आगे की सुनवाई होनी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते 12 मई को ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग जैसी आकृति के वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था।
इस फैसले को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को सुनवाई की और वैज्ञानिक सर्वे पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश के निहितार्थों की बारीकी से जांच की जानी चाहिए। साथ ही सुनवाई की अगली तिथि तय कर दी गई थी।