पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा
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अदालत के आदेश के बाद शनिवार और रविवार को चार-चार घंटे में 80 से 85 फीसदी ही सर्वे ही हुआ था। 17 मई को सर्वे रिपोर्ट वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में पेश की जाएगी। शनिवार को तहखाने के अंदर एक हिस्से में मलबे व पानी की वजह से सर्वे की पूरी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। वादी पक्ष ने मलबा हटाकर जांच करने की बात कही तो प्रतिवादी पक्ष ने एतराज भी जताया था। आज इसी हिस्से का सर्वे हुआ। वीडियोग्राफी के लिए विशेष कैमरों का इस्तेमाल किया गया। सर्वे को लेकर आज भी जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था रही।
इधर, बुद्ध पूर्णिमा और सोमवार का दिन होने के कारण बाबा विश्वनाथ के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ी। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में गंगा स्नान के लिए पहुंचे। उनकी सुरक्षा के लिए गंगा में एनडीआरएफ और जल पुलिस तैनात को तैनात किया गया। बाबा धाम आने वाले श्रद्धालुओं को गेट नंबर एक और गंगा द्वार से मंदिर में प्रवेश कराया गया। श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
ज्ञानवापी की ओर आने वाले सभी रास्ते को बैरिकेडिंग कर बंद कर दिए गए हैं। मैदागिन-गोदौलिया मार्ग पर आम वाहनों पर प्रतिबंध है। बांसफाटक क्षेत्र की दुकानें सर्वे होने तक बंद हैं। पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश सर्वे शुरू होते ही सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। पैदल मार्च कर शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से क्षेत्र को दो जोन में बांटा गया है। काशी और वरुणा जोन में एडिशनल सीपी स्तर के अधिकारी बनाए गए हैं। गोदौलिया से दशाश्वमेध मार्ग होते हुए गंगा तक पुलिस चप्पे-चप्पे पर नजर रख रही है।
ज्ञानवापी से बाहर निकलते सर्वे टीम में शामिल अधिवक्ता
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इससे पहले शनिवार को ज्ञानवापी परिसर में दूसरे दिन रविवार को सर्वे के दौरान गुंबद, दीवारों और तहखाने की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी की गई। 80 फीसदी से ज्यादा सर्वे की कार्यवाही पूरी हो चुकी है। शनिवार को सर्वे के बाद बाहर निकले हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि हमने जिन बातों को आधार बनाकर वाद दायर किया था, वह और भी मजबूत हो गया है। सर्वे में जो साक्ष्य व तथ्य मिल रहे हैं, उनसे हमारी राह और आसान हो जाएगी। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष के वकील ने तीन बार ऊंची आवाज में कहा कि कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं मिला।
चौैक क्षेत्र में पुलिस की बैरिकेडिंग
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सर्वे में क्या मिला, क्या नहीं मिला, इसकी हकीकत सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल होने के बाद ही सामने आएगी। लेकिन, वादी पक्ष की ओर से एक सदस्य ने इस बात का भी दावा किया कि सैकड़ों वर्ष पुराना मामला होने के कारण बहुत कुछ जमीन के काफी अंदर दब गया है। ऐसे में काशी विश्वनाथ मंदिर व अन्य देव विग्रहों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य पुरातात्विक सर्वेक्षण के बाद मिलने के आसार हैं।
यहां बता दें कि फास्ट ट्रैक की अदालत ने पिछले साल अप्रैल 2021 में ज्ञानवापी परिसर में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू आदि विश्वेश्वर मामले में पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश दिए थे। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को रडार विधि से सर्वे का आदेश दिया गया था। मगर, बाद में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की आपत्ति पर उच्च न्यायालय ने फास्ट ट्रैक अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है।