काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में हजारों साल पुराने ज्ञानवापी तीर्थ के अवशेष का पता चला है। बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर योजना के तहत हो रही खुदाई के दौरान वहां सुरंगनुमा रास्ता मिला है। इसमें भीतर उतरने के लिए चौकोर सीढ़ियां और कलात्मक पत्थरों से निर्मित रास्ता भी दिखा है।
जानकारी मिलने के बाद मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने पुरातत्व विभाग और भारत कला भवन के विशेषज्ञों की टीम से इस स्थल का अध्ययन शुरू करा दिया है। खुदाई फिलहाल रोकवा दी गई है।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वहां पहली और दूसरी शताब्दी के तालाब या भवन के अवशेष मिल सकते हैं। फिलहाल विशेषज्ञों को आगे खुदाई कराने और मलबा हटाए जाने का इंतजार है। काशी के प्राचीन जल तीर्थों में ज्ञानवापी सबसे प्रधान तीर्थ के रूप में विख्यात रही है।
स्कंद पुराण के काशी खंड में भी ज्ञानवापी तीर्थ का उल्लेख मिलने से इसकी पौराणिक महिमा सनातनधर्मियों के लिए अहम रही है। हजारों वर्ष बाद बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर योजना के तहत हो रही खुदाई में इस प्राचीन तीर्थ के अवशेषों की मौजूदगी के आरंभिक साक्ष्य मिले हैं।
बाबा की यज्ञशाला के उत्तरी हिस्से के जर्जर भवन को बीते महीने नगर निगम की ओर से गिराए जाने के बाद उसी स्थल पर बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर की योजना को मूर्त रूप देने के लिए मलबा हटाने का काम कराया जा रहा था। पत्थरों को हटाने के साथ ही खुदाई भी कराई जा रही थी।
उसी दौरान वहां सुरंगनुमा रास्ता मिला। भीतर तालाब जैसी बनावट नजर आई। जहां नीचे उतरने की सीढ़ियां मिली हैं, वहां से चंद कदम की दूरी पर ज्ञानवापी कूप स्थित है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वहां ज्ञानवापी तीर्थ हो सकता है।