वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी
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अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने शुक्रवार के जिला जज की अदालत के आदेश पर कहा कि पांच महिलाएं पूजापाठ के व्यक्तिगत अधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं। हम देश और दुनिया के पूरे हिंदुओं के ज्ञानवापी से जुड़े धार्मिक हित की लड़ाई लड़ रहे हैं। ज्ञानवापी से संबंधित एएसआई से सर्वे को लेकर मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।
बीते 12 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में मिली शिवलिंग जैसी आकृति की कार्बन डेटिंग का आदेश एएसआई को दिया था। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।
साध्वी पूर्णांबा और शारदांबा ने भी की थी मांग
अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने बताया कि ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे की मांग के लिए साध्वी पूर्णांबा और साध्वी शारदांबा की ओर से भी वाद दाखिल है। बृहस्पतिवार को सिविल जज सीनियर डिनीजन की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर मांग की गई थी कि उनका वाद मां शृंगार गौरी के वाद में समायोजित कर सुनवाई की जाए। इस पर सुनवाई के लिए 26 जुलाई की तिथि नियत है। इसी बीच एएसआई से सर्वे कराने का आदेश पारित हो गया।
ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले शिवलिंग जैसी आकृति के वैज्ञानिक सर्वे का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी दिया था। इस आदेश को अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। वजूखाना क्षेत्र अब भी कोर्ट के आदेश पर सील है। वजूखाना में ही शिवलिंग जैसी आकृति मिलने का दावा हिंदू पक्ष की ओर से किया गया है।