हिंदू पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन
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यह भी कहा कि अप्रत्यक्ष देवता भी हिंदू लॉ में मान्य है, जो देवता हटा दिए गए, उनके हट जाने से भी देवता का स्थान वही रहता है। वक्फ प्रॉपर्टी के संबंध में उन्होंने दलील दी कि मुस्लिम लॉ में स्पष्ट है कि जो प्रॉपर्टी वक्फ को दी जाती है, वह मालिक द्वारा ही दी जा सकती है। इसमें कोई भी वक्फ डीड नहीं है और न ही वक्फ संपत्ति से जुड़ा कोई सबूत न्यायालय में पेश किया गया।
अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने बताया कि 1937 में जो दीन मोहम्मद का फैसला हुआ, वह सभी पर बाध्यकारी नहीं है, क्योंकि उसमें हिंदू पक्षकार ही कोई नहीं था। अदालत ने नियमित बहस जारी रखते हुए सुनवाई की तारीख 15 जुलाई नियत कर दी।
ज्ञानवापी में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने और परिसर हिंदुओं को सौंपने के मामले में बृहस्पतिवार को वादी किरण सिंह के संशोधन आवेदन को सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही विपक्ष की आपत्ति को अनौपचारिक मानते हुए खारिज भी किया है। इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 21 जुलाई नियत की गई है।
विश्व वैदिक सनातन संस्था के जितेंद्र सिंह बिसेन की पत्नी किरण सिंह की ओर से अदालत में वाद दाखिल कर मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने और परिसर में मिले शिवलिंग के दर्शन पूजन राग भोग की अनुमति मांगी गई है। इस वाद में कुछ शब्दों के संशोधन की अनुमति अदालत से मांगी गई थी, जिसे अदालत ने तीन दिन में संशोधित करने का आदेश दिया है।
इस मामले में हिंदू पक्ष की तरफ से पैरवी में मान बहादुर सिंह, शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी, अनुष्का तिवारी और अंजुमन इंतजामिया की तरफ से अभय नाथ यादव, रईस अहमद, मुमताज अहमद, मिराजुद्दीन सिद्दीकी व एखलाक अहमद और शासन की तरफ से डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय मौजूद रहे।