उन्होंने कहा कि इस पूरे ज्ञानवापी मामले में कोई तीसरा पक्ष तैयार हो रहा है जो मेरे और अधिवक्ता हरिशंकर जैन में फूट डालना चाह रहा है। क्योंकि कुछ लोग थक गए हैं इन सारे कार्यों को देखते हुए। जिस प्रकार से मेरे और हरिशंकर जैन की संयुक्ती से देश में कुछ चल रहा है, ऐसे में कुछ लोग हम दोनों को तोड़ने की पूरी कोशिश में जुटे हैं। लेकिन जितेंद्र सिंह बिसेन हार नहीं मानेगा।
हरिशंकर जैन मेरे मार्गदर्शक हैं। वो हमें निर्देश कर दें कि आगे क्या करना है तो हम वो करें। हम दोनों का अपना-अपना काम है। मुकदमा बनाने की जिम्मेदारी उनकी है। किस केस में कौन वादी होगा, कौन अधिवक्ता होगा ये सब मेरा फैसला होता है। आगे भी मुकदमे में कई फर्क नहीं पड़ेगा। बस वादी पक्ष के लोग सावधान रहें। एक तीसरा पक्ष फायदा उठाने की कोशिश में है।
इससे पहले मीडिया से बात करते हुए जितेंद्र सिंह बिसेन ने कहा था कि ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष बिखर चुके हैं। दुर्भाग्य है कि जब से ज्ञानवापी मामला सुर्खियों में आया है तब से कई लोग पार्टी बनने की कोशिश कर रहे हैं। वादी पक्ष के लोग गुमराह हो गए हैं। वो कठपुतली बन गए हैं। समझ नहीं आ रहा कि वो क्या कर रहे हैं।
इस पूरे मामले को विवाद में खड़ा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सामान्य से मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना दिया गया है। अगर सर्वे कमीशन की टीम शांति से रिपोर्ट दाखिल कर देती तो ठीक होता। लेकिन दो दिन का समय ले लेना, चीजों को उलझा देना, मामले का मीडिया ट्रायल में चला जाना, मामले को विश्वव्यापी बना देना जैसी चीजें हो रही हैं वो समझ से परे है।