ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है।
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टीम में शामिल कुछ लोगों ने दावा किया कि ज्ञानवापी की दीवारों और पत्थरों पर कई चिह्न मौजूद हैं। दीवारों पर अंकित आकृतियों की स्थापत्य शैली को रिकॉर्ड में लिया गया। तहखानों में कमल व स्वास्तिक चिह्न मिलने की भी बात कही गई। हालांकि, मस्जिद पक्ष के वकीलों ने इन दावों को खारिज किया था।
उस वक्त याचिका दाखिल करने वाली महिलाओं के पैरोकार डा. सोहन लाल आर्य ने बताया कि जैसा सोचा था, वैसे ही साक्ष्य मिले हैं। कार्रवाई के दौरान मौजूद रहे विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष और पक्षकार राखी सिंह के पैरोकार जीतेंद्र सिंह बिसेन ने भी कहा था कि मंदिर होने को लेकर अपेक्षा से ज्यादा साक्ष्य मिले हैं।
हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है।
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सर्वे के तीसरे और आखरी दिन ज्ञानवापी के वजूखाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था। इसे मुस्लिम पक्ष ने फव्वारा बताया। हिंदू पक्ष अदालत पहुंचा तो वजूखाने को सील कर दिया गया। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है। एडवोकेट कमिश्नर विशाल सिंह ने 14 से 16 मई के बीच श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी में सर्वे किया था। विशाल सिंह ने रिपोर्ट के आखिर में जिक्र किया कि सर्वे पूरा नहीं हो सका है। सर्वे अभी जारी रहना चाहिए। इतिहासकार और विषय विशेषज्ञों से परिसर की जांच कराना जरूरी है।
काशी विश्वनाथ धाम में सीएम योगी (फाइल)
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि अगर हम ज्ञानवापी को मस्जिद कहेंगे तो फिर विवाद होगा। मुझे लगता है कि भगवान ने जिसे दृष्टि दी है वह देखे न...। त्रिशूल मस्जिद के अंदर क्या कर रहा है? हमने तो नहीं रखे हैं न...! ज्योतिर्लिंग हैं... देव प्रतिमाएं हैं... पूरी दीवारें चिल्ला-चिल्ला कर क्या कह रही हैं...? और हमें लगता है कि यह प्रस्ताव मुस्लिम समाज की तरफ से आना चाहिए कि साहब ऐतिहासिक गलती हुई है। और, उस गलती के लिए हम चाहते हैं कि समाधान हो।