ज्ञानवापी के मूल मामले में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बहस का मौका खत्म कर दिया गया है। मामले में बहस के लिए नोटिस तामील कराया गया था फिर भी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से जिम्मेदार उपस्थित नहीं हो सके।
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विशेष न्यायाधीश द्वितीय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पूनम पाठक की अदालत ने ज्ञानवापी के वर्ष 1991 के मूल मुकदमे से संबंधित रिवीजन अर्जी पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बहस का मौका समाप्त कर दिया है। सुनवाई के दौरान पर्याप्त नोटिस तामील कराया गया था फिर भी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से जिम्मेदार बहस के लिए उपस्थित नहीं हो सके। अब सात नवंबर को सुनवाई होगी।
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अगली सुनवाई में दिवंगत हरिहर पांडेय की बेटियों की तरफ से अधिवक्ता अपना पक्ष रखेंगे। यह अर्जी हरिहर पांडेय की बेटियों की तरफ से दाखिल की गई है। मामले में बहस के लिए सुन्नी सेंट्रल बोर्ड को विधिवत नोटिस तामील कराया जा चुका था, लेकिन बोर्ड की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ था।
मामले में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा कि मामला वाद मित्र के बदलने से संबंधित है। इसमें सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को कुछ खास नहीं कहना था।