Varanasi News: कोर्ट में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से एक अर्जी दाखिल कर अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई। इस पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) की अदालत में मंगलवार को ज्ञानवापी से जुड़े प्राचीन मामले की सुनवाई टल गई। अब अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी। कोर्ट में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से एक अर्जी दाखिल कर अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई।
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अर्जी में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय की याचिका पर वरशिप एक्ट के तहत दर्ज सभी विवादित मामलों की अग्रिम सुनवाई पर रोक लगाई है, इसलिए इस मामले में भी सुनवाई नहीं की जा सकती। इस पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने इस विशेष मामले में कोई रोक नहीं लगाई है। कोर्ट को याद दिलाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही छह महीने के भीतर मुकदमे के निस्तारण का आदेश दे चुका है, जिसके तहत त्वरित सुनवाई चल रही है। हाल ही में जिला जज की अदालत ने भी सील वजुखाने के ताले पर कपड़ा बदलने से जुड़े मामले में प्रशासन की अर्जी पर सुनवाई से इन्कार कर दिया था।
कार्य क्षेत्र बदलने के बाद अब इस कोर्ट में न्यायिक अधिकारी सुरभि अग्रवाल कार्यभार संभालेंगी। यह मामला 1991 में दायर उस मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने की मांग की गई है।
वर्तमान में पक्षकार बनाए जाने संबंधी प्रार्थना पत्र पर सुनवाई चल रही है। इस मामले में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता तौहिद खान ने पिछली तिथियों पर अर्जी दाखिल की थी।