ज्ञानवापी के पिछले हिस्से की दीवार, जिस पर हिंदू धर्म से जुड़े निशान मिलने के दावे
- फोटो : सोशल मीडिया
इन दावों पर मुस्लिम पक्ष की तरफ से अंजुमन इंतेजामिया कमेटी ने सवाल उठाए और अदालत में आपत्ति भी दाखिल की। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हिंदू पक्ष का दावा ठीक नहीं है। औरंगजेब ने कोई मंदिर नहीं तुड़वाया था। हिंदू पक्ष दावा कर रहा है, लेकिन साक्ष्य नहीं दे रहा। ज्ञानवापी में लंबे समय से नमाज पढ़ी जा रही है। बहरहाल, दावे और आपत्ति के बीच जिला जज की अदालत ने एएसआई को सर्वे का आदेश दिए थे।
अब हाईकोर्ट ने भी सर्वे पर मुहर लगा दी है। ऐसे में विवाद के समाधान की उम्मीद जगी है। हिंदू पक्ष का कहना है कि एएसआई के सर्वे में जो कुछ आएगा, उसे मानकर आगे बढ़ा जाएगा। हालांकि, मुस्लिम पक्ष अब भी सर्वे के पक्ष में नहीं है। अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सर्वे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि के विवाद का अंत एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से ही हुआ था। रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करके आदेश सुनाया था। मुस्लिम पक्ष को सहयोग की भावना के साथ आगे आना चाहिए। 354 वर्ष से चल रहे विवाद के समाधान के लिए वैज्ञानिक पद्धति से हो रहे सर्वे में मसाजिद कमेटी को सहयोग करना चाहिए। वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे में जो तथ्य सामने आएं, उसका हम भी स्वागत करेंगे और उन्हें भी करना चाहिए।
ज्ञानवापी परिसर के बाहर सर्वेक्षण टीम
- फोटो : अमर उजाला
जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर की संरचना को नुकसान पहुंचाएं बगैर ही सब कुछ वैज्ञानिक तरीके से एएसआई को स्पष्ट करने के लिए कहा था। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी के मौजूदा निर्माण की प्रकृति और आयु का निर्धारण करें। इमारत के अलग-अलग हिस्सों और संरचना के नीचे मौजूद ऐतिहासिक और धार्मिक कलाकृतियों व अन्य सामग्रियों को देख कर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। जो भी कलाकृतियां दिखें, उनकी भी उम्र और प्रकृति के बारे में बताएं। अदालत ने कहा है कि एएसआई की रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या मंदिर को ध्वस्त कर उसके ढांचे के ऊपर मस्जिद बनाई गई है।
ज्ञानवापी में अधिवक्ता आयुक्त के कमीशन की कार्रवाई के दौरान 16 मई 2022 को वजूखाने में शिवलिंग मिलने का दावा हिंदू पक्ष ने किया था। वहीं, मसाजिद कमेटी का कहना था कि वह पुराना फव्वारा है। हिंदू पक्ष के आवेदन पर 16 मई 2022 को जिला अदालत ने वजूखाने को सील करने का आदेश दिया था। उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।