प्रदर्शन का आधार और संदर्भ
एनएसयूआई ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग के भीतर के कुछ फैसले सामने आए थे। इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया गया था। निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इन फैसलों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए हैं। एनएसयूआई-बीएचयू ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर यह प्रदर्शन आयोजित किया। छात्रों ने इन आपत्तियों को गंभीरता से लेने की अपील की।
एनएसयूआई के प्रमुख आरोप
एनएसयूआई ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उनका कहना है कि इन अनियमितताओं से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है। युवाओं के भविष्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। संगठन ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने उनकी गिरफ्तारी की भी मांग दोहराई। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
निर्वाचन आयोग का जवाब और छात्रों की आगे की योजना
निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं। इसके बावजूद एनएसयूआई-बीएचयू ने अपनी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुचिता और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की आवाज आगे भी उठाई जाएगी। संगठन ने भविष्य में भी ऐसे मुद्दों पर प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया।