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Varanasi News: गुटखा व्यापारी ने लाइसेंसी पिस्टल से कनपटी पर गोली मार कर जान दी

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चेतगंज थाने के कालीमहल इलाके की घटना, पुलिस ने कहा - अवसाद की वजह से की आत्महत्या

माई सिटी रिपोर्टर

वाराणसी। कालीमहल इलाके के गुटखा व्यापारी विजय सिंह राठौर उर्फ बबलू राठौर (52) ने शनिवार को लाइसेंसी पिस्टल से दायीं कनपटी पर गोली मार कर जान दे दी। सूचना पाकर चेतगंज थाने की पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस के अनुसार, विजय के परिजनों और करीबियों से पूछताछ में सामने आया है कि वह लगभग 12 माह से अवसादग्रस्त चल रहे थे।
पुलिस पारिवारिक कलह के बिंदु को भी खंगाल रही है। चेतगंज थाना क्षेत्र के कालीमहल निवासी विजय सिंह राठौर चार भाइयों में सबसे छोटे थे। विजय के परिवार में उनकी पत्नी श्वेता सिंह, दो बेटियां संस्कृति व श्रुति और सबसे छोटा बेटा शिवांश है। श्वेता सिंह ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार की रात घर में पूजा-पाठ के कारण भोजन करने के बाद सभी लोग रात दो से ढाई बजे के लगभग सोये थे। शनिवार की सुबह श्वेता को विजय कमरे में नहीं दिखे तो उन्हें लगा कि टहलने गए होंगे। काफी देरी के बाद भी विजय नहीं आए तो उन्होंने उन्हें फोन करना शुरू किया, लेकिन कॉल नहीं रिसीव हुई। विजय को खोजते हुए श्वेता तीन मंजिला मकान के भूतल पर आईं तो वह गेस्ट रूम में बेड पर खून से लथपथ पड़े हुए थे और बगल में ही उनकी पिस्टल पड़ी हुई थी। आनन-फानन में विजय को कैंट रोडवेज स्थित एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस संबंध में एसीपी चेतगंज गौरव कुमार ने बताया कि लाइसेंसी पिस्टल और कारतूस कब्जे में ले लिया गया है। अब तक की पूछताछ में यही बात सामने आई है कि विजय अवसादग्रस्त थे और इधर अपने दोस्तों से भी कोई खास सरोकार नहीं रखते थे।
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चुनाव से जमा थी पिस्टल, हाल ही में घर में लाए थे
परिजनों ने बताया कि विजय की .32 बोर की लाइसेंसी पिस्टल इस साल संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के पहले से जमा थी। शारदीय नवरात्र से पहले उन्होंने शस्त्र पूजन के लिए पिस्टल वापस ली थी। दो बेटियों के जन्म के लंबे अंतराल के बाद विजय का बेटा शिवांश पैदा हुआ तो वह उस पर कुछ ज्यादा ही स्नेह लुटाते थे। उसके लिए पूजा-पाठ कराने से लेकर वह सार्वजनिक आयोजनों में अपने साथ भी लेकर जाते थे।
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दोस्तों के दोस्त विजय ने बना ली थी सबसे दूरी
विजय हमेशा मुस्कुराते रहने वाले, मिलनसार और दोस्तों के दोस्त के रूप में जाने जाते थे। दोस्तों के साथ सुबह टहलना और चाय की दुकान पर अड़ीबाजी करना उनकी दिनचर्या में शुमार था। विजय के दोस्तों ने बताया कि बीते 11-12 माह से वह धीरे-धीरे सभी से दूरी बनाने लगे थे और गुमसुम से रहते थे।सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर लोगों ने लिखा कि विजय तुमने यह क्या किया?
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