शहीदी शताब्दी दिवस पर निकाली गई शोभायात्रा में शामिल लोग।
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Guru Tegh Bahadur Martyrdom Day: सिख धर्म के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी शताब्दी दिवस के उपलक्ष्य में रविवार को 41 साल बाद जगतगंज गुरुद्वारे से शोभायात्रा निकाली गई। पंज प्यारे की अगुवाई में संगत के मुख से गुरुवाणी की अनुगूंज होती रही। वहीं, गुरु के बलिदान की याद दिला रही थी।
रविवार की दोपहर गुरुद्वारे में संगत ने गुरुग्रंथ साहिब पर मत्था टेका। अरदास के बाद आगे पंज प्यारे घुड़सवार पर और पैदल चल रहे थे। उनकी अगुवाई में ठाट-बाट से शोभायात्रा निकाली गई। महिलाएं और पुरुष के अलावा गुरुनानक खालसा बालिका, इंग्लिश स्कूल की छात्राएं शबद-कीर्तन संग गुरुवाणी का पाठ करते हुए चल रही थीं।
शोभायात्रा लहुराबीर, पिपलानी कटरा, कबीरचौरा, मैदागिन चौराहा होते हुए गुरु तेगबहादुर की तपस्थली गुरुद्वारा बड़ीसंगत नीचीबाग शाम 6:30 बजे पहुंची। आरती और कीर्तन दरबार सजा। संगत ने गुरुग्रंथ साहिब पर मत्था टेका। रागी जत्था ने देर रात तक शबद कीर्तन से निहाल किया।
गुरुग्रंथ साहिब की पालकी साहिब की भी आरती उतारी गई। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य ग्रंथी जगतार सिंह और रंजीत सिंह ने कहा कि गुरु तेगबहादुर महाराज खासकर कश्मीरी पंडितों और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया और उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। अपने बच्चों की भी शहादत दी। संगत ने अटूट लंगर छका।