अघोर पीठ (बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुंड) : अघोर संप्रदाय के इस विश्व प्रसिद्ध केंद्र में देश-विदेश से अघोर पंथ के अनुयायी जुटेंगे, जहां विशेष तांत्रिक और आध्यात्मिक गुरु-पूजन होगा।
श्री विद्यामठ और शंकराचार्य मठ : यहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती समेत अन्य संतों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु... के जाप के साथ पारंपरिक पादुका पूजन किया जाएगा।
कबीरचौरा मठ : संत कबीर दास की कर्मभूमि रहे इस मठ में निर्गुण परंपरा के संत और कबीरपंथी अनुयायी गुरु वाणी का पाठ और कबीर भजनों के जरिए गुरु को नमन करेंगे।
गढ़वाघाट आश्रम : इस पीठ पर यादव समाज समेत समाज के सभी वर्गों के लाखों भक्तों की गहरी आस्था है। यहां गुरु पूर्णिमा पर विशाल भंडारे और दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
स्वामी नारायण मंदिर : यहां भी भक्ति भाव के साथ विशेष सत्संग, कीर्तन और गुरु देव के स्वागत की भव्य तैयारियां चल रही हैं।
पातालपुरी मठ : यहां मुस्लिम महिलाएं गुरु बालक दास महाराज के दर्शन के लिए आती हैं। वह प्रभु श्रीराम की आरती भी उतारेंगी।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रो. सुभाष पांडेय ने बताया कि विधि और शास्त्र पूर्वक पूजन और दान पुण्य करने से जीवन में समृद्धि और शांति बनी रहती है। अध्यात्मिक दृष्टि से अच्छा होता ही है, साथ ही ग्रहों के शुभ प्रभाव को भी बढ़ाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद सबसे पहले अपने माता-पिता और गुरुओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। घर में सत्यनारायण भगवान की कथा या विष्णु पूजा करना अत्यधिक शुभ फल देता है।