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रामनगर के सफेद बैंगन व हरा मटर का स्वाद चखेंगे खाड़ी देशवासी खाड़ी देशों के वासी

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निर्यात से पूर्व प्रदर्शन के लिए रखा गया रामनगर भंटा - फोटो : CITY
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वाराणसी। रामनगर का सफेद बैंगन व हरी मटर का स्वाद खाड़ी देशों के वासी भी चख सकेंगे। मंगलवार को बाबतपुर एयरपोर्ट से एयर इंडिया के विमान से शारजाह संयुक्त अरब अमीरात भेजा गया। इसके पूर्व भी बनारस सहित पूर्वांचल से लंगड़ा, दशहरी आम, काला एवं सांवा चावल, हरी मिर्च सहित अन्य सब्जियों को खाड़ी देशों में भेजा जा चुका है।
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एपीडा के अध्यक्ष व वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय एम अंगामुथु और कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने एयरपोर्ट के कार्गो सेंटर से रामनगर के सफेद बैंगन व मटर के एक बड़े शिपमेंट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। एक टन मटर 50 किलो सफेद बैगन भेजा गया। इस दौरान एपीडा अध्यक्ष एम अंगामुथु ने कहा कि वाराणसी सहित अन्य आसपास के किसानों के उत्पाद को निर्यात करने की पहल हो रही है, इससे किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि यहां के आम, फल, चावल के बाद अब यहां की सब्जियां भी राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात होने लगी हैं। आने वाले दिनों में वाराणसी के इस पूरे परिक्षेत्र को एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट का व फूड प्रोसेसिंग का बहुत बड़ा हब बनाया जा रहा है।
कृषि उत्पादों को जलमार्ग से भेजा जाएगा बांग्लादेश
कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल में एग्रीकल्चर के क्षेत्र में तमाम संभावनाएं हैं। आने वाले समय में वाराणसी को निर्यात क्षेत्र का पूरा हब बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में वाराणसी से जलमार्ग के रास्ते पानी की जहाज से भी एग्रीकल्चर प्रोडक्ट को बांग्लादेश सहित साउथ एशिया के देशों को सीधे भेजा जाएगा। इससे जहां हमारा निर्यात बढ़ रहा हैं, वही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारे उपज का उचित व अधिक मूल्य मिल रहा है। जक्खिनी क्षेत्र के ग्राम सभा तिलंगा के किसान सुरेंद्र कुमार सिंह व शुभम सिंह, विरावकोट के सुनील कुमार का मटर व बैंगन भेजा गया।
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जीआई टैग से पूर्व रामनगर भंटा को मिली अलग पहचान
वाराणसी। रामनगर के स्थानीय कृषि उत्पाद रामनगर भंटा को मंगलवार को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग से पूर्व एक नई पहचान मिली। जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त ने बताया कि बुधवार को हरी मटर के साथ पहली बार रामनगर भंटा का यूएई को निर्यात किया गया। हालांकि इसका क्षेत्रफल जिले में कम है। जिसे बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जीआई टैग विशेषज्ञ डॉ रजनीकांत ने बताया कि कृषि उत्पाद में पान, आम, आदम चीनी चावल और रामनगर भंटा के नाम का प्रस्ताव जीआई टैग के लिए भेजा गया है। रामनगर भंटा की खेती रामनगर से लेकर चुनार तक के किसान करते है। जिसमें पुरुषोतमपुर, कैलहट, जलालपुर सहित चिरईगांव ब्लाक के बरियासनपुर, बरबसपुर, शंकरपुर, उमराह, संदहा के गंगा किनारे बसे किसान रामनगर भंटा की खेती करते हैं। जिसका चोखा सबसे बेहतर होता है।
सामान्य बैगन से बिकता है महंगा
चिरईगांव के बरबसपुर गांव के किसान हौसला प्रसाद ने बताया कि सामान्य बैगन से इसकी उत्पादन क्षमता कम होती है। ये 70 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से बिक जाता है जो सामान्य बैगन से महंगा है। सामान्य बैगन 45 दिनों में तैयार होता है जबकि रामनगर भंटा तैयार होने में करीब 65 दिन लगता है।

हस्त कला संकुल में लगी एक जिला एक उत्पाद प्रदर्शनी में वाराणसी के काष्ठ कला के उत्पाद बैग की खरीद?- फोटो : CITY

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