जीएसटी ऑडिट के नाम पर उत्पीड़न से उद्यमियों में नाराजगी है। बुधवार को इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन कार्यकारिणी की उच्चस्तरीय बैठक में उद्यमियों ने कहा कि ऑडिट के नाम पर हो रही लूटखसोट नहीं थमी तो प्रधानमंत्री से इसकी शिकायत की जाएगी।
आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने कहा कि जीएसटी के प्रावधान उद्यमियों और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए काफी तर्कसंगत हैं, लेकिन उच्चाधिकारियों के स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्यरत अधिकारी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। ऑडिट के नाम पर हो रही लूटखसोट और उत्पीड़न अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पिछले दिनों ऑडिट कमिश्नर सोमेश तिवारी ने आईआईए के साथ ऑनलाइन बैठक के दौरान इस विषय पर स्पष्ट कहा था कि कोई भी अधिकारी ऑडिट के लिए किसी भी प्रतिष्ठान में नहीं जाएगा और सारे कागजात सिर्फ ऑनलाइन मांगे जाएंगे, लेकिन उनके आदेशों की अवहेलना करते हुए अधिकारी आज भी खुलेआम कारखानों एवं प्रतिष्ठानों में जाकर उद्यमियों एवं व्यापारियों का उत्पीड़न और भयादोहन कर रहे हैं। ऑडिट के मास्टर गाइड के नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए ऑडिट प्रक्रिया को एक डेढ़ माह तक लंबित कर वसूली का खेल खेला जा रहा है। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की जाएगी। आईआईए के राष्ट्रीय सचिव राजेश भाटिया ने कहा कि इसी प्रकार सर्विस टैक्स की नोटिस भी बिना जमा कागजातों की जांच के जारी कर दी जा रही है। वहीं व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिए बिना ही उद्यमी एवं व्यापारी के विरुद्ध आदेश पारित कर दिए जा रहे हैं, जबकि कोरोना काल में वर्चुअल सुनवाई का स्पष्ट प्रावधान है। आईआईए के मंडल अध्यक्ष नीरज पारिख ने मांग की कि आयकर की तरह जीएसटी ऑडिट को भी फेसलेस किए जाने का प्रावधान किया जाए। बैठक में आईआईए के मंडल सचिव राहुल मेहता, संयुक्त सचिव प्रशांत अग्रवाल, सचिव पंकज अग्रवाल आदि मौजूद रहे।