पहले जहां कम आबादी के चलते सेमी में भूजल स्तर नीचे जाता था। अब आबादी 40 लाख के ऊपर हो चुकी है। ऐसी स्थिति में हर साल एक से सवा मीटर के रेंज में जलस्तर नीचे जा रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में काशी में पानी की किल्लत हो जाएगी।
शहर के कुछ क्षेत्रों के अलावा आराजी लाइन, हरहुआ ब्लाॅक, पिंडरा ब्लाॅक डार्क जोन में हैं। यहां बोरिंग प्रतिबंधित है। इनके अलावा बड़ागांव, चिरईगांव, चोलापुर, काशी विद्यापीठ व सेवापुरी ब्लाक क्रिटिकल जोन में हैं। जल संरक्षण के लिए लंबे समय से कवायद चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यही कारण है कि साल दर साल पानी का जलस्तर नीचे जा रहा है।
बोले अधिकारी
गर्मी के इस मौसम में जल स्तर नीचे चला जाता है। मार्च में एक मीटर और इस समय 1.10 मीटर नीचे पानी चला गया है। भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के साथ तालाबों और कुओं की सफाई कराई जा रही है ताकि रिचार्जिंग बेहतर हो सके। - राहुल कुमार, जिला भूगर्भ जल अधिकारी
हैंडपंप से पानी निकालने का प्रयास।
- फोटो : अमर उजाला
जानकारों के अनुसार कुंड और तालाब को पाटने से वाटर रिचार्जिंग कम हुई है। सामान्य बारिश पर पर्याप्त पानी मिल जाता है। शहरी क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने की वजह नदी आधारित सरकारी पेयजल योजनाओं का फेल होना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी नहरों के अभाव के कारण भूगर्भ जल से ही सिंचाई हो रही है। 20 लाख की शहरी आबादी के साथ ही कल-कारखानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूगर्भ जल का अतिदोहन ही किया जा रहा है।
जिले के स्थान - मीटर में भूगर्भ जलस्तर
| आराजीलाइन ब्लाक |
17.75 |
| बड़ागांव ब्लाक |
13.63 |
| चिरईगांव ब्लाक |
16.88 |
| चोलापुर ब्लाक |
13.30 |
| हरहुआ ब्लाक |
17.73 |
| काशी विद्यापीठ ब्लाक |
13.91 |
| पिंडरा ब्लाक |
17.98 |
| सेवापुरी ब्लाक |
15.31 |
| भोजूबीर |
17.38 |
| सारनाथ |
16.90 |
| लक्सा |
17.01 |
| लंका |
17.27 |