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Water Crisis: तीन महीने में 0.10 मीटर और नीचे गया भू जलस्तर, सबमर्सिबल मोटर हो रहे फेल; नहीं मिल रहे मिस्त्री

Thu, 20 Jun 2024 04:18 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: वाराणसी शहर के अधिकांश मोहल्लों में 100 से 120 फीट पर चल रहा सबमर्सिबल मोटर फेल हो रहा है। पानी देना बंद कर दिया है। वरुणा पार इलाके में 150 फीट नीचे पानी नहीं मिल रहा है। 
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नैपुरा में बदहाल हैंडपंप। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गर्मी के बढ़ते तापमान के बीच पानी के लिए हर जगह हाहाकार मचा है। तीन महीने के भीतर बनारस जिले का भूगर्भ जलस्तर 0.10 मीटर और नीचे चला गया है। मार्च में भूगर्भ जलस्तर जहां 1 मीटर था वह अब 1.10 मीटर नीचे चला गया है। इस समय गर्मी के चलते लगातार नीचे जा रहे पानी से हैंडपंपों की बोरिंग फेल हो रही है। इस मोटर बनाने के लिए मिस्त्री तक नहीं मिल रहे हैं।

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भूगर्भ जल विभाग के अनुसार गर्मी में भूगर्भ जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। बारिश के बाद स्थिति बेहतर होगी।

एक औद्योगिक परिसर में करीब 350 फीट बोरिंग कराई गई फिर भी पर्याप्त पानी नहीं मिला है। शहर के लोग पहले से लगाए गए पाइप में पांच से दस फीट जोड़कर टंकी में पानी चढ़ा रहे हैं। शहर के अलावा ग्रामीण इलाके में भी जल का स्तर तेजी से नीचे की ओर भाग रहा है। ब्लॉकों में 80 से 100 फीट पर पानी दे रहे हैंडपंप पानी देना बंद कर दिए हैं।

साल दर साल खराब हो रहे हालात

पहले जहां कम आबादी के चलते सेमी में भूजल स्तर नीचे जाता था। अब आबादी 40 लाख के ऊपर हो चुकी है। ऐसी स्थिति में हर साल एक से सवा मीटर के रेंज में जलस्तर नीचे जा रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में काशी में पानी की किल्लत हो जाएगी। 

शहर के कुछ क्षेत्रों के अलावा आराजी लाइन, हरहुआ ब्लाॅक, पिंडरा ब्लाॅक डार्क जोन में हैं। यहां बोरिंग प्रतिबंधित है। इनके अलावा बड़ागांव, चिरईगांव, चोलापुर, काशी विद्यापीठ व सेवापुरी ब्लाक क्रिटिकल जोन में हैं। जल संरक्षण के लिए लंबे समय से कवायद चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। यही कारण है कि साल दर साल पानी का जलस्तर नीचे जा रहा है।

बोले अधिकारी
गर्मी के इस मौसम में जल स्तर नीचे चला जाता है। मार्च में एक मीटर और इस समय 1.10 मीटर नीचे पानी चला गया है। भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के साथ तालाबों और कुओं की सफाई कराई जा रही है ताकि रिचार्जिंग बेहतर हो सके। - राहुल कुमार, जिला भूगर्भ जल अधिकारी

काशी के कुंड तालाब पाटने से कम हुई वाटर रिचार्जिंग

हैंडपंप से पानी निकालने का प्रयास। - फोटो : अमर उजाला
जानकारों के अनुसार कुंड और तालाब को पाटने से वाटर रिचार्जिंग कम हुई है। सामान्य बारिश पर पर्याप्त पानी मिल जाता है। शहरी क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने की वजह नदी आधारित सरकारी पेयजल योजनाओं का फेल होना है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में भी नहरों के अभाव के कारण भूगर्भ जल से ही सिंचाई हो रही है। 20 लाख की शहरी आबादी के साथ ही कल-कारखानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूगर्भ जल का अतिदोहन ही किया जा रहा है।

जिले के स्थान - मीटर में भूगर्भ जलस्तर
आराजीलाइन ब्लाक  17.75
बड़ागांव ब्लाक 13.63
चिरईगांव ब्लाक 16.88
चोलापुर ब्लाक 13.30
हरहुआ ब्लाक 17.73
काशी विद्यापीठ ब्लाक 13.91
पिंडरा ब्लाक 17.98
सेवापुरी ब्लाक 15.31
भोजूबीर 17.38
सारनाथ 16.90
लक्सा 17.01
लंका 17.27
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पानी बचाने के तरीके

  • शहर में होने वाले निर्माण के दौरान रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जाए
  • टपक सिंचाई का संयंत्र का इस्तेमाल खेतों में किया जाए
  • प्रत्येक आरओ मशीन में हर साल करीब 14 हजार लीटर पानी नष्ट होता है इस पानी का इस्तेमाल पेड़-पौधों को सींचने और गाड़ी धोने में किया जा सकता है।
  • वॉशिंग मशीन में कपड़ा धोने से पानी ज्यादा खर्च होता है इसलिए कम कपड़े हैं तो हाथ से धोएं।
  • बर्तन धोने के लिए नल की जगह बाल्टी या टब का इस्तेमाल करके पानी बचाया जा सकता है।
  • कार साफ करने के लिए बाल्टी में इस्तेमाल करें, इससे हर बार आप करीब 130 लीटर पानी बचा सकते हैं।
  • बाथरूम में लीकेज से पानी बर्बाद हो जाता है, इसलिए तुरंत सुधरवा लिया जाना चाहिए।
  • टूथ ब्रश करते समय यदि नल लगातार खुला रहता है तो एक बार में 4-5 लीटर पानी बह जाता है, इसलिए नल खुला न छोड़ें।
  • शॉवर, स्वीमिंग पुल और बाथ टब की बजाय सामान्य रूप से नहाने से बचेगा पानी।
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