हरे शैवाल से कम होता है पानी में आक्सीजन
बीएचयू में इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वैज्ञानिक डॉ कृपाराम ने बताया था कि जल में युट्रोफिकेशन प्रक्रिया होने से एल्गी ब्लूम (हरे शैवाल) बनते हैं। ऐसा तब होता है जब जल में न्यूट्रिएंट काफी बढ़ जाते हैं। इस कारण गैर जरूरी स्वस्थ जीवों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होती है। ऐसे में शैवालों को प्रकाश संश्लेषण करने का सबसे उपयुक्त वातावरण मिलता है। तब पानी में ऑक्सीजन कम होने लगता है, जिससे बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) सबसे पहले प्रभावित होती है।
काशी में गंगा की खराब स्थिति ने शासन और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं कागजों पर असि नाले को बंद करने की रिपोर्ट दी गई है लेकिन हकीकत अभी भी गंगा में असि नाले से सीवेज बहाया जा रहा है। जिलाधिकारी ने इसका संज्ञान लेते हुए जलनिगम के अधिकारियों को भी फटकार लगाई। उन्होंने गंगा प्रदूषण पर चिंता जताते हुए गंगा में गिर रहे नालों को जल्द से जल्द बंद करने के निर्देश दिए। असि और वरुणा संगम से गिरने वाले नालों के जरिए गिरने वाले सीवेज को जल्द से जल्द रोकने का निर्देश दिया गया।