बहुचर्चित निर्भया कांड के चार आरोपियों को फांसी की सजा बरकरार रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निर्भया के बलिया स्थित गांव के लोगों ने खुशी जताई है। इस गांव में निर्भया को लोग बिटिया कहते हैं। बिटिया के दादा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
उनका कहना था कि अब उनके कलेजे को कुछ ठंडक मिली है। इस कांड के दरिंदों को मौत से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए थी। 95 वर्षीया दादी ने अपनी पोती की शहादत को आनेवाले समय के लिए एक उदाहरण बताया। कोर्ट का फैसला आने के बाद इस ग्राम सभा की महिलाओं ने मंदिरों में पूजा अर्चना की। बिटिया के गांव के लोगों ने खुशी जताई है। लोगों का कहना था कि मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय काबिले तारीफ है। ऐसे बहशी आरोपियों को यही सजा मिलनी चाहिए।
उधर, जिले के लोगों में भी निर्भया प्रकरण में फांसी की सजा मिलने से खुशी का माहौल रहा। निर्भया प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने चार आरोपियों के खिलाफ निचली अदालतों द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है।
उन्हें इस जघन्य अपराध का दोषी बताते हुए फांसी की सजा को सही माना है। निर्भया के चाचा एवं अन्य सदस्यों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है। उसमें कहीं से भी कोई त्रुटि नहीं है। इस फैसले पीड़ित परिवार को देर से ही सही वाजिब न्याय मिला है।
कहा कि इससे बिटिया के आत्मा को शांति तो मिलेगी ही। बिटिया के गांव में इस फैसले को लेकर पूरे दिन चचाएं होती रही। कोई इसे देर से आया फैसला बता रहा था तो कोई इस सही ठहराने में जुटा हुआ था। लोगों का कहना था कि फैसला आने से इस तरह का अपराध को अंजाम देने से भी लोग डरेंगे।
वहीं दूसरी ओेर जिले के लोगों ने भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को सराहा है। समाजिक कार्यकर्ता रिपुंजय रमण पाठक रानू कहा कि इससे पीड़ित परिवार को भी काफी राहत मिलेगी। वहीं समाज में भी अपराध रोकने के लिए संदेश जाएगा।
ग्राम प्रधान सविता देवी का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि इस देश में न्याय अभी भी जिंदा है और अपराधी कितना ही शातिर या बलवान क्यों न हो अगर वह कोई अपराध करता है तो उसे उचित दंड भी मिलेगा।
बता दें कि यह घटना 16 दिसम्बर 2012 की है जब चलती बस में निर्भया के साथ गैंगरेप कर सड़क पर फेंक दिया गया था।