इस लापरवाही के बाद जिला पंचायती राज अधिकारी ने उन्हें निलंबित कर दिया और कंट्रोल रूम, विकास भवन से संबद्ध किया गया। तीसरे मामले में विकासखंड चिरईगांव के ग्राम पंचायत गिरधरपुर के ग्राम विकास अधिकारी अनिल कुमार को निलंबित किया गया है।
उन्होंने साफ-सफाई, फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव का कार्य नहीं कराया, जिससे गांव में संक्रामक बीमारियां फैल गईं। दो युवतियों की मौत हो गई और सात लोग अस्पताल में भर्ती हुए। समय पर हैंडपंपों को रिबोर भी नहीं कराया।
इस गंभीर लापरवाही पर उन्हें निलंबित कर विकास खंड काशी विद्यापीठ से संबद्ध किया गया है। चौथे मामले में चोलापुर ब्लॉक के ग्राम विकास अधिकारी जयप्रकाश मौर्य को निलंबित किया गया है। बार-बार निर्देश देने के बावजूद गोशालाओं में साफ-सफाई, भूसा और बीमार पशुओं के लिए अलग से सेट का निर्माण नहीं कराया। निर्देशों की अनदेखी और कार्यों में शिथिलता के चलते उन्हें निलंबित कर विकासखंड पिंडरा से संबद्ध किया गया है।