सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि मृत्यु के समय जिस गंगा की सिर्फ दो बूंद मुंह में डालने से मोक्ष मिलने की मान्यता है, उसका जल अब काशी में पीने लायक भी नहीं रह गया। आस्था के चलते लोग यहां आते तो हैं लेकिन गंगा जल मुंह में डालने से हिचकते हैं कि कहीं कुछ हो न जाए।
गंगा को निर्मल बनाने के लिए देश के हर नागरिक को मिलकर प्रयास करना चाहिए। जब गंगा स्वच्छ होगी तभी काशी और उत्तर प्रदेश को हम सुंदर बना सकेंगे। ये बातें उन्होंने मंगलवार की शाम अस्सी घाट पर इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस के गंगा राफ्टिंग दल को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहीं।
राज्यपाल ने आईटीबीपी के अफसरों से कहा कि वह देव प्रयाग से काशी तक के सर्वेक्षण की रिपोर्ट शीघ्र प्रदेश सरकार को भेजें। राफ्टिंग दल की रिपोर्ट मिलने पर देखा जाएगा कि गंगा में प्रदूषण के कारणों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार क्या कर सकती है।
नगर पालिकाओं या अन्य संस्थाओं को भी इसके लिए दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरलता का मुद्दा केंद्र सरकार के एजेंडे में है, आने वाले दिनों में इसे और प्रमुखता से रखा जाएगा। जेएनयू को देश तोड़ने का अड्डा बताने वाले आरएसएस के बयान पर उन्होंने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
इस मौके पर पीएमओ के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, महापौर राम गोपाल मोहले, विधायक रवींद्र जायसवाल, आईटीबीपी के आईजी राजा बाबू सिंह, डीआईजी नवीन अरोड़ा के अलावा विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग और विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव एवं पार्षद गोविंद शर्मा मौजूद थे।