गंगा दशहरा पर रविवार की देर शाम राज्यपाल राम नाईक ने वैदिक मंत्रोच्चार से पतित पावनी गंगा की पूजा की। पत्नी के साथ पहुंचे राज्यपाल ने गंगा के अभिषेक के बाद पावन धारा के प्रदूषित होने पर अफसोस जताया।
कहा कि गंगा को भगीरथ ने लंबे तप के बाद पृथ्वी पर उतारा था। यह हिंदुस्तान के लोगों का फर्ज बनता है कि इसे बचाकर रखा जाए। फूलों की अल्पनाओं, रंगोलियों और रंग-बिरंगे वंदनवारों से सजे घाट पर उन्होंने गंगा आरती देखी।
राज्यपाल ने अविरलता-निर्मलता के मसले पर कहा कि गंगा को निर्मल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने काशी की महिमा का भी बखान किया। कहा कि काशी में रहकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यहां के गंगा जल की एक बूंद अगर कंठ में चली जाए तब भी मुक्ति मिल जाती है, सनातनधर्मियों की ऐसी धारणा रही है। जो गंगा इतनी पवित्र और आस्था का प्रतीक है, उसकी धारा को दूषित कर दिया गया है।
‘राम तेरी गंगा मैली हो गई पापियों के पाप धोते-धोते...’ गीत का भी उन्होंने जिक्र किया। कहा कि अब गंगा को निर्मल बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसका असर जल्द दिखेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन साल के कार्यकाल की जमकर तारीफ की। कहा कि पीएम ने तीन साल में काशी को अलग रूप दिया है। यूपी के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
यूपी में बढ़ते अपराधों को लेकर एक सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि आप सरकार पर भरोसा रखें। अपराध के बढ़ते ग्राफ पर जल्द रोक लगेगी। इससे पहले 11 वैदिक आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा कराई। इस मौके पर गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र, हनुमान यादव ने स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम देकर राज्यपाल को सम्मानित किया।