नागरी प्रचारिणी सभा के चुनाव के निर्देश के बाद साहित्यकारों के साथ ही शैक्षणिक संगठनों ने भी समर्थन किया है। काशी के प्रबुद्धजनों ने नागरी प्रचारिणी को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने की मांग की है।
उच्च शिक्षा संवर्ग के प्रभारी डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि नागरी प्रचारिणी सभा राष्ट्रीय महत्व की संस्था है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल से लेकर हिंदी साहित्य जगत के अनेकों मूर्धन्य साहित्यकारों का इससे जुड़ाव रहा है। इस संस्था पर कालांतर में चलकर एक परिवार का कब्जा हो गया। आज यह संस्था और इसका पुस्तकालय रख रखाव के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। उसे संचालित करने के लिए इधर प्रबंध कार्यकारिणी के चुनाव की चर्चा जोरों पर शुरू है। कुछ तथाकथित साहित्यकारों की कुदृष्टि भी इस पर पड़ गई है। वह लोग संस्था पर कब्जा करना चाहते हैं। प्रचारिणी का हाल कहीं गांधी विद्या संस्थान, राजघाट की तरह ही ना हो जाए। केंद्र या राज्य सरकार को समय रहते आगे आकर इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करके इसकी पूरी व्यवस्था अपने हाथ में लेनी चाहिए। इसके लिए एक साहित्यिक जगत से तथा कुछ गंभीर और निस्वार्थ भाव से काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रबंधन का कार्य सौंपना चाहिए।