सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने के आरोपी को एसटीएफ ने बलिया के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के जमुआ गांव के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कोलकाता में रहने वाले और बलिया के बांसडीह थाना क्षेत्र के डुहीमुसी चांदपुर निवासी शशि भूषण उपाध्याय के रूप में हुई है। उसके पास से एक मोबाइल फोन, चार फर्जी निवास प्रमाण पत्र और 1200 रुपये बरामद हुए हैं। आरोपी के खिलाफ बलिया के कोतवाली नगर थाने में मुकदमा दर्ज करा कर आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है।
एसटीएफ की वाराणसी इकाई के एडिशनल एसपी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचना प्राप्त हुई थी। इस संबंध में एसटीएफ फील्ड इकाई, वाराणसी द्वारा अभिसूचना संकलन की कार्रवाई की जा रही थी।
अभिसूचना संकलन के क्रम में इंस्पेक्टर पुनीत परिहार के नेतृत्व में एक टीम बलिया में मौजूद थी। इंस्पेक्टर पुनीत को पता लगा कि विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला शशिभूषण उपाध्याय कोलकाता में रहता है। वह जमुआ गांव में किसी से मिलने आने वाला है। इस सूचना पर एसटीएफ की टीम ने उसे जमुआ गांव के पास से गिरफ्तार कर लिया।
फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा कर सेना में हुआ भर्ती
पूछताछ में शशि भूषण ने बताया कि वह इंटरमीडिएट पास है। इंटरमीडिएट पास होने के बाद उसे पता चला कि पश्चिम बंगाल सहित पूर्वोत्तर राज्यों के मूल निवासियों की मेरिट अन्य राज्यों की तुलना में कम होने पर भी विशेष नियम के तहत सेना में भर्ती हो जाती है। इस पर वर्ष 2000 में वह पश्चिम बंगाल का अपना फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर सेना में भर्ती हो गया। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण के दौरान उसके निवास प्रमाण पत्र और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन सेना द्वारा कराया जा रहा था। इसे शंका हुई कि वह पकड़ा जाएगा तो वह अपना प्रशिक्षण छोड़ कर भाग गया।
अपना खर्च चलाने के लिए करने लगा ठगी
शशि भूषण ने बताया कि अपना खर्च चलाने के लिए उसे ठगी की राह सूझी। वह कोलकाता चला गया। इसके बाद बलिया और पूर्वांचल के अन्य जिलों के युवकों को झांसा देने लगा कि मेरिट कम होने पर भी पश्चिम बंगाल का निवास प्रमाण पत्र बनवा कर वह उनकी भर्ती सेना में करा देगा। इसके लिए प्रति व्यक्ति वह लगभग चार लाख रुपये लेता था। इसके बाद बंगाल के अपने परिचित स्थानीय लोगों को पैसे का लालच देकर उनसे शपथ पत्र लिखवा लेता था कि अमुक व्यक्ति उनके यहां 15 वर्षों से अधिक समय से रहता है। इसके बाद स्थानीय सभासद को भी पैसे का लालच देकर उससे निवास प्रमाण पत्र बनवा ले लेता था। दोनों फर्जी कागज के आधार पर वह तहसील निवास प्रमाण बनवा लेता था। उसी निवास प्रमाण पत्र के आधार पर उसी पते का आधार कार्ड भी बनवा लेता था। नौकरी न मिलने पर जब लोग पैसा वापस मांगते थे तो वह छिप कर रहने लगता था।