अक्सर ड्यूटी से नदारद रहते हैं गांवों में तैनात डाक्टर
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फरमान के बाद भी बलिया जिले में कई सरकारी डाक्टर निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। कोई नर्सिंग होम में तो कोई अपने आवास पर ही मरीजों को देख रहा है। सरकारी डाक्टरों की क्लिनिक खोलकर मोटी कमाई करने की यह चाह मरीजों पर भारी पड़ रही है। स्थिति यह है कि सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण उन्हें निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम का रुख करना पड़ रहा है।
बता दें कि सरकारी चिकित्सक मोटी तनख्वाह लेते हैं। बावजूद पैसा कमाने की भूख कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज में महज खाना पूर्ति की जाती है। वहीं अपनी निजी क्लीनिक व अस्पताल में मरीजों का बेहतर इलाज करते हैं।
सूत्रों की माने तो बलिया जिला अस्पताल एवं सीएचसी व पीएचसी पर तैनात कुछ चिकित्सक खुलेआम निजी प्रैक्टिस करते हैं। कुछ ऐसे भी चिकित्सक हैं जो पड़ोसी जिले और पड़ोसी प्रांत बिहार तक भी निजी प्रैक्टिस करते हैं। कुछ चिकित्सक सप्ताह में कुछ ही दिन ड्यूटी पर आते हैं, लेकिन विभागीय बाबुओं से सेटिंग होने की वजह से उन पर आंच नहीं आती।
इसी की आड़ में वह दूसरे जिलों में भी निजी प्रैक्टिस करते हैं। हालांकि इसकी जानकारी स्वास्थ्य महकमे के उच्च अधिकारियों को भी है, लेकिन इन चिकित्सकों के खिलाफ अधिकारी भी उदासीन बने हुए हैं। यह हालात तब है कि योगी सरकार ने आदेश जारी कर साफ कर दिया है कि सरकारी चिकित्सक निजी प्रैक्टिस नहीं करेंगे।
पूर्ववत सरकारों में भी इस तरह के आदेश जारी होते रहे हैं, लेकिन कभी चिकित्सकों पर निगरानी नहीं की गई। इस कारण आदेश केवल हवा हवाई साबित हुए। मामले में बलिया सीएमओ एसके तिवारी ने कहा कि सरकारी चिकित्सकों को निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाए जाने का मुख्यमंत्री का निर्देश मिला है।
इसे जल्द ही अमल में लाया जाएगा। आदेश के बाद भी यदि कोई सरकारी चिकित्सक निजी प्रैक्टिस करते मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।