फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: मदरसे में नेपाली शिक्षक की नियुक्ति पर अब शासन करेगा फैसला, शासन को भेजी गई रिपोर्ट; निर्देश का इंतजार

Thu, 17 Sep 2026 06:29 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

मदरसे में नेपाली शिक्षक की नियुक्ति के मामले में अब शासन स्तर से फैसला होगा। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने प्रकरण से संबंधित जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। रिपोर्ट में नियुक्ति से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। अब शासन की ओर से रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और निर्णय लिया जाएगा।

विज्ञापन
मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम में पढ़ाई करते बच्चे। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम में एक नेपाली शिक्षक की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने इस मामले में अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब इस पर अंतिम निर्णय शासन को ही लेना है।

विज्ञापन


मुबारकपुर निवासी मुहम्मद अरबी ने 16 जनवरी को जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसे में मौलवी मोहम्मद रजा की वर्ष 2016 में नियम विरुद्ध नियुक्ति की गई है।

मोहम्मद रजा मूल रूप से नेपाल के धनुसा जिले के निवासी हैं। मदरसा प्रबंध समिति ने उनकी विदेशी नागरिकता की जानकारी छिपाकर उन्हें सरकारी लाभ दिलाया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने मामले की जांच शुरू की।
विज्ञापन


प्रबंधन ने 31 जनवरी को अपना स्पष्टीकरण और अभिलेख जमा किए, जिसमें बताया गया कि मोहम्मद रजा नेपाल के हैं। प्रबंधन ने दावा किया कि उनकी नियुक्ति भारत-नेपाल मैत्री संधि 1950 के तहत हुई है, जिसके अनुसार कोई भी नेपाली नागरिक बिना वीजा के भारत में काम कर सकता है। हालांकि, शिकायतकर्ता ने प्रबंधन के जवाब में कई विसंगतियां होने का आरोप लगाया था।

पूर्व में भी निलंबित हो चुकी है मान्यता
यह पहली बार नहीं है जब मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम विवादों में आया है। इससे पहले ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा को शिक्षण कार्य देने के मामले में मदरसे की मान्यता निलंबित की जा चुकी है। शमसुल हुदा ने ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर ली थी। मदरसा शिक्षा परिषद ने इस मामले में मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी थी। सरकार से अनुदानित इस मदरसे को 28 सितंबर 1948 को स्थायी मान्यता मिली थी। प्रबंधक सरफराज अहमद ने इस संबंध में नौ जून को प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
विज्ञापन

मामले की जांच कर हमारी ओर से सारी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस पर फैसला शासन को लेना है। शासन की ओर से जो निर्देश मिलेगा, उसका पालन किया जाएगा। - वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें