पूर्व में भी निलंबित हो चुकी है मान्यता
यह पहली बार नहीं है जब मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम विवादों में आया है। इससे पहले ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा को शिक्षण कार्य देने के मामले में मदरसे की मान्यता निलंबित की जा चुकी है। शमसुल हुदा ने ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर ली थी। मदरसा शिक्षा परिषद ने इस मामले में मदरसे की मान्यता निलंबित कर दी थी। सरकार से अनुदानित इस मदरसे को 28 सितंबर 1948 को स्थायी मान्यता मिली थी। प्रबंधक सरफराज अहमद ने इस संबंध में नौ जून को प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
मामले की जांच कर हमारी ओर से सारी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस पर फैसला शासन को लेना है। शासन की ओर से जो निर्देश मिलेगा, उसका पालन किया जाएगा। - वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।