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UP: सरकारी एंबुलेंस में फर्जी नंबर प्लेट, फिटनेस फेल; इंश्योरेंस भी नहीं; फिर भी मरीजों को पहुंचा रहे अस्पताल

Sun, 07 Sep 2025 09:54 AM IST
प्रगति चंद अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में सरकारी एंबुलेंस में फर्जी नंबर प्लेट लगे हैं, फिटनेस फेल है, इंश्योरेंस भी नहीं है। फिर भी मरीजों को इसी एंबुलेंस से अस्पताल तक पहुंचाया जा रहा है। 
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फर्जी नंबर प्लेट के सहारे चल रहीं सरकारी एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में शहर में सरकारी एंबुलेंस भी फर्जी नंबर प्लेट के सहारे चल रही हैं। फिटनेस फेल है। प्रदूषण सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस समाप्त हो चुका है, फिर भी एंबुलेंस से मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। परिवहन विभाग की जांच में तीन एंबुलेंस मानक पर फेल पाई गई हैं। इससे हादसे का डर बना हुआ है।

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स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, शहर में 108 नंबर की 28 एंबुलेंस हैं। 102 नंबर की 38 एंबुलेंस चल रही हैं। चार सरकारी अस्पतालों के पास अपनी एंबुलेंस भी है। लंका, ककरमत्ता, खजुरी, कबीरनगर से 300 से ज्यादा प्राइवेट एंबुलेंस चल रही हैं। ज्यादातर एंबुलेंस की सीटें फटी हैं। ऑक्सीजन सिलिंडर बहुत पुराना है। बीएचयू अस्पताल के पास से चलने वाली एंबुलेंस में मेडिकल स्टाफ नहीं रहता है। एंबुलेंस चालक ही मरीजों को अस्पताल ले जाता है, फिर घर तक छोड़ता है।  

केस - 1
जिला महिला अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस (यूपी 32 जेड 6870) की जानकारी आरटीओ में उपलब्ध ही नहीं है। कबीरचौरा तिराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के सिपाही श्याम सुंदर ने इस नंबर को अपने सॉफ्टवेयर के जरिये चेक किया तो पता चला कि प्लेट पर दर्ज नंबर फर्जी है। वाहन का कोई विवरण ही नहीं दर्ज है। यह एंबुलेंस वर्षों से मरीजों को अस्पताल ले जाने और ले आने का काम कर रही है।
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केस- 2
एंबुलेंस (यूपी 41 जी 3804) का फिटनेस 3 अक्तूबर 2018 से समाप्त हो गया था, फिर भी संचालन किया जा रहा है। इसी तरह मंडलीय अस्पताल में खड़ी सरकारी एंबुलेंस (यूपी 41 जी 2749) का इंश्योरेंस ढाई साल पहले 11 मार्च 2023 को ही समाप्त हो चुका है। इसका प्रदूषण सर्टिफिकेट भी 12 अक्तूबर 2022 और फिटनेस 13 जून 2023 को समाप्त हो चुका है।

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एंबुलेंस को नहीं रोकती ट्रैफिक पुलिस

ट्रैफिक पुलिस एंबुलेंस को नहीं रोकती है। इसका फायदा उठाया जा रहा है। बीएचयू और आसपास के क्षेत्रों से एंबुलेंस लिखी कई प्राइवेट टैक्सियां चलती हैं। इनके ड्राइवर एंबुलेंस के किसी भी मानक का पालन नहीं करते हैं। इनके पास आपातकालीन कोई व्यवस्था नहीं रहती है और न ही मेडिकल स्टाफ। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में कमीशन का खेल चतला है। 4-5 किमी के लिए ही 1200-1500 रुपये वसूले जाते हैं। सरकारी एंबुलेंस मुफ्त में चलती है।

शव वाहिनी की फिटनेस भी नहीं
मंडलीय अस्पताल में खड़ी सरकारी शव वाहिनी (यूपी 41 जी 3743) का फिटनेस 20 मार्च 2018 को ही समाप्त हो चुका है। यानी यह गाड़ी बिना फिटनेस के ही साढ़े सात साल से चल रही है। शव वाहिनी का नंबर प्लेट ब्लेड से खुरचा हुआ है।
 

क्या बोले अधिकारी
निजी अस्पतालों की एंबुलेंस की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। इसमें स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर सकता है। सरकारी एंबुलेंस ठीक हैं। अस्पतालों में जो एंबुलेंस खड़ी हैं, वह चल नहीं रही हैं। मामले की जानकारी ली जाएगी। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ 

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