ट्रैफिक पुलिस एंबुलेंस को नहीं रोकती है। इसका फायदा उठाया जा रहा है। बीएचयू और आसपास के क्षेत्रों से एंबुलेंस लिखी कई प्राइवेट टैक्सियां चलती हैं। इनके ड्राइवर एंबुलेंस के किसी भी मानक का पालन नहीं करते हैं। इनके पास आपातकालीन कोई व्यवस्था नहीं रहती है और न ही मेडिकल स्टाफ। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में कमीशन का खेल चतला है। 4-5 किमी के लिए ही 1200-1500 रुपये वसूले जाते हैं। सरकारी एंबुलेंस मुफ्त में चलती है।
शव वाहिनी की फिटनेस भी नहीं
मंडलीय अस्पताल में खड़ी सरकारी शव वाहिनी (यूपी 41 जी 3743) का फिटनेस 20 मार्च 2018 को ही समाप्त हो चुका है। यानी यह गाड़ी बिना फिटनेस के ही साढ़े सात साल से चल रही है। शव वाहिनी का नंबर प्लेट ब्लेड से खुरचा हुआ है।
क्या बोले अधिकारी
निजी अस्पतालों की एंबुलेंस की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। इसमें स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर सकता है। सरकारी एंबुलेंस ठीक हैं। अस्पतालों में जो एंबुलेंस खड़ी हैं, वह चल नहीं रही हैं। मामले की जानकारी ली जाएगी। -डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ