पाणिनी कन्या महाविद्यालय के दीक्षांत समारोह का कार्यक्रम शुक्रवार से आयोजित होगा। इसमें शामिल होने देश के अलग-अलग हिस्से के साथ ही नेपाल से भी छात्राएं आई हैं।
दीक्षांत समारोह में शामिल होने आई बिहार की दामिनी आर्या ने बताया कि पांचवीं कक्षा से पाणिनी कन्या महाविद्यालय में संस्कृत की शिक्षा ली। साथ ही भाला, लाठी, कराटे भी सीखा है। अभी भी लोगों को परंपरा के प्रति जागरूक करती हूं। बागपत से आई प्राची आर्या ने बताया कि यहां से शिक्षा पूरी करने के बाद अभी जेएनयू से एमए कर रहीं है। उनका कहना है कि आज के दौर में बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है पर अभी हमारे समाज में वैदिक क्षेत्र में बस लड़कों को ही महत्व दिया जाता है। वैदिक शिक्षा के बाद मैं समाज को संदेश देना चाहती हूं कि लड़कियां भी वैदिक शिक्षा में बेहतर कर सकती हैं।
नेपाल से आईं मुना घिमिरे ने पाणिनी में शिक्षा लेने के बाद यहां पर शिक्षिका के रूम में शिक्षा भी दे चुकी हैं। पिता योगीराज गोरखपुर में आयुर्वेदिक डॉक्टर रह चुके हैं। उनका कहना है यहां शिक्षा लेने के बाद अपने देश में लोगों को अपने परंपरा के प्रति जागरूक करेंगी। अभी वहां पर संस्कृत विश्वविद्यालय तो है पर लोगों में इतनी जागरूकता नहीं है।