कोहरे की चादर से ढंके आसमान पर गुरुवार की रात पुत्र कामना के लिए व्रत रखने वाली महिलाओं ने चांद का घंटों इंतजार किया। जब धुंध में चंद्रमा की किरणों की झलक नहीं मिली तब पंचांग के समय के लिहाज से व्रतियों ने बाल की लटों से अर्घ्य देकर संतान के यश, मंगल के लिए प्रार्थना की।
इसी के साथ जमकर आतिशबाजी हुई और दीपदान किया गया। उधर, छप्पन विनायकों की नगरी में गणेश मंदिरों में सुबह से देर रात तक दर्शनार्थियों की लंबी कतार लगी रही।
रात 8:17 बजे चंद्रदर्शन होना था लेकिन व्रतियों को खराब मौसम की वजह से निराश होना पड़ा। मंत्रोच्चार के साथ सनातनधर्मी परिवारों में व्रती महिलाओं ने घर-घर अर्घ्यदान किया।
उधर, लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर में व्रती महिलाओं के अलावा अन्य भक्तों का रेला भोर में ही उमड़ पड़ा। सोनारपुरा में चिंतामणि गणेश मंदिर में दूब और फूलों से भगवान चिंतामणि का शृंगार किया गया था। गढ़वासी टोला स्थित सिद्धि विनायक के दरबार को भी फूलों, पत्तियों से सजाया गया था।
दुर्गाकुंड स्थित दुर्ग विनायक के पट सुबह पांच बजे मंगला आरती के साथ खुले। सात बजे से गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ शुरू हुआ। इसके बाद विश्व कल्याण की कामना से एक लाख दुर्वा से गणेश सहस्त्रार्चन किया गया। दोपहर 1.30 बज फलाहार भोग लगाया गया। शाम साढ़े सात बजे विराट आरती में हजारों भक्तों ने हिस्सा लिया।
बाबा को तीन कुंतल लड्डू का भोग लगा। ज्ञानेश्वर दुबे के सानिध्य में आरती दीपक दुबे, अनुराग मिश्र ने की। गुब्बारों, फलों के अलावा गुलाब, गेंदा, बेला के फूलों से सजाया गया। दुर्गाकुंड इलाका लतर से जगमगाता रहा।