कथक, अभिनय, ओडिसी, कुचिपुड़ी, भरतनाट्यम और समकालीन नृत्य की पांचों विधाओं के अंश से तैयार कृष्ण-अर्जुन का प्रसंग दर्शकों के मन को छू गया। भारतीय दर्शन के वैश्विक महत्व की अत्यंत प्रभावी प्रस्तुति को नृत्य संगीत के माध्यम से मंच पर कलाकारों ने जीवंत किया। शुक्रवार को अमृत स्वधारा नृत्य एवं संगीत उत्सव के तीन दिवसीय आयोजन का रंगारंग समापन हुआ।
शुक्रवार को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में तीसरी संध्या की प्रथम प्रस्तुति गीता महात्म की रही। ओडिसा डांस अकादमी की ओर से भगवद्गीता के मूल को नृत्य के माध्यम से भावपूर्ण मनोहारी स्वरूप में मंच पर साकार किया गया। दूसरी प्रस्तुति यूपी के सोनचिरैया की मुक्तिगाथा रही। पद्मश्री मालिनी अवस्थी द्वारा भारतीय स्वतंत्रता अभियान में जिन पुण्य आत्माओं ने प्राणों की आहुति प्रदान की उनकी शहादत की गाथा गीतों के माध्यम से अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत की। तीसरी प्रस्तुति काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंचकला संकाय द्वारा प्रो. राजेश शाह एवं प्रो. प्रवीण उद्धव के निर्देशन में वाद्यवृंद की रही। अंतिम प्रस्तुति भी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंचकला संकाय द्वारा डॉ. दीपान्विता रॉय के निर्देशन में कथक समूह नृत्य की रही। पद्मश्री डॉ राजेश्वर आचार्य एवं डॉ रत्नेश वर्मा ने कलाकारों को सम्मानित किया। इस दौरान हेलेन आचार्य, डॉ. प्रीतेश आचार्य, तापस दास, अतुल सिंह, डॉ. संगीता पंडित, प्रमोद मिश्रा, सुरेन्द्र रावत उपस्थित रहे। संचालन जैनेंद्र सिंह ने किया।