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बेफिक्र होकर लगवाएं टीका, बच्चे भी रहेंगे सुरक्षित

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वाराणसी। कोरोना की तीसरी लहर से बचाव का यही उपाय है कि घर के सभी 18 वर्ष के ऊपर के लोग टीका लगवाएं और खुद को सुरक्षित रखें। अभिभावकों के टीका लगवाने से उनमें संक्रमण नहीं के बराबर होगा और इससे बच्चे भी संक्रमित होने से बचेंगे। मौजूदा समय में बच्चों के लिए टीका नहीं आया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार, अभिभावकों को टीका लगवाना बेहद जरूरी है।
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चिकित्सकों के अनुसार, कोरोना हर किसी को प्रभावित करता है। बच्चों को लेकर बहुत सावधानी बरतें। बच्चे यदि बीमारी में जकड़े भी रहते हैं तो उसका बहुत पता नहीं चलता है। इसलिए बच्चों की विशेष देखभाल करें। कोरोना काल के दौरान अनजान हाथों में बच्चों को न दें। बाहर की खाने पीने की चीजें न दें या सैनिटाइज करके ही दें। बच्चों के साथ समय गुजारें, उनसे बात करें। इस समय अधिकतर परिवार में लोग संक्रमित हो रहे हैं तो बच्चों पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। जांच होने पर रिपोर्ट निगेटिव रहती है लेकिन बच्चों की सेहत कमजोर हो जाती है। एक तरह से बच्चे सप्ताह भर तक बेसुध रहते हैं। इस तरह के कई केस रोजाना सामने आ रहे हैं।
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सुरक्षित है टीका, डरने की बात नहीं
तेजी से बढ़ते संक्रमण पर नियंत्रण में कोरोना टीकाकरण प्रभावी भूमिका निभाएगा। इसलिए लोगों को बेफिक्र होकर टीका लगवाना चाहिए। कोरोना का टीका पूरी तरह सुरक्षित है। माता-पिता अगर टीकाकरण कराए हैं और घर में हैं तो उससे बच्चों की सेहत पर कोई दुष्प्रभाव पड़ने वाला नहीं है। ऐसे में किसी तरह की भ्रांति मन में नहीं रखनी चाहिए। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में जो अध्ययन हुए हैं, उनके अनुसार गर्भवती महिला यदि संक्रमित हो गई है तो संक्रमण का असर गर्भ में पल रहे उसके बच्चे पर भी नहीं पड़ता है। इस तरह महिला हो या पुरुष बिना किसी हिचकिचाहट के टीकाकरण कराना चाहिए। बस यह है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीकाकरण के बाद बताए गए कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते रहना चाहिए। - प्रो.एसपी शर्मा, बाल रोग विभाग बीएचयू
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माता-पिता के टीके से बच्चे सुरक्षित
कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण में जागरूकता बहुत जरूरी है। ऐसे में टीकाकरण को लेकर किसी तरह की भ्रांतियां नहीं होनी चाहिए। यह जानना जरूरी है कि आम तौर पर माता-पिता से ही बच्चों में संक्रमण की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में जितने माता-पिता टीकाकरण समय से करा लेंगे उतना ही बच्चों की सेहत के लिए बेहतर होगा। किसी तरह के संशय पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। - डॉ. अशोक राय, बाल रोग विशेषज्ञ
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केस-1
सिकरौल वार्ड के रहने वाले संतोष तिवारी पति व पत्नी कुछ दिन पूर्व कोरोना संक्रमित हो गए थे। 7 साल का बेटा निगेटिव रहा। हालांकि बाद में बेटे की तबीयत बहुत खराब हो गई। सप्ताह भर तक पुत्र एक तरह से कोमा में ही रहा। चिकित्सकों ने बताया कि माता-पिता के संक्रमित होने का असर रहा कि बच्चा भी बीमार हो गया।
केस-2
सिगरा इलाके के नमकीन व्यापारी के परिवार में सभी सदस्य संक्रमित हो गए। उस समय बच्चों पर कोई असर नहीं हुआ। जांच में निगेटिव ही रहे। मगर, बाद में बच्चों की तबीयत अत्यधिक खराब हो गई थी। 15 से 20 दिन तक दो बच्चे बीमार रहे। भूख न लगने और बेसुध रहने की दिक्कत थी। ठीक होने में समय लगा।
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