जमीन मिले तो काशी में मेट्रो की राह आसान होगी। मेट्रो की राह में चार बाधाएं आ रही हैं। इसे दूर करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ शनिवार को कमिश्नरी में हुई कार्यशाला के दौरान राइट्स के अधिकारियों ने चर्चा की। लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी कुमार केशव ने बताया कि परियोजना का ड्राफ्ट डीपीआर 15 दिसंबर तक तैयार हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में बीएचयू से भेल तक तैयार ड्राफ्ट डीपीआर पर लोगों से आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे। इसके लिए तीन सप्ताह का समय लग जाएगा। इसके बाद नए साल के जनवरी माह में फाइनल डीपीआर बन जाएगा। इसे राज्य सरकार से पास कराने के बाद केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
वहां से मंजूरी मिलने के बाद धरातल पर निर्माण कार्य अप्रैल 2017 से शुरू होगा। राइट्स के ग्रुप जनरल मैनेजर पीयूष कंसल ने बताया कि अंतिम दौर की चर्चा के लिए यहां आए हैं। बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी से मुलाकात कर उनसे डीएलडब्ल्यू मार्ग पर अस्पताल के आस पास जमीन मांगी गई है।
उन्होंने सहमति जताई है। लंका चौराहे पर बनने वाले मेट्रो स्टेशन को बीएचयू और ट्रामा सेंटर से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए चौराहे से अंडर ग्राउंड इंट्री गेट बनेगा। इस संबंध में राइटस के अधिकारियों ने बीएचयू के कुलपति से वार्ता भी की है। इस पर भी लगभग सहमति मिल चुकी है।
लंका चौराहे से भूमिगत रास्ता बनेगा जो बीएचयू अस्पताल और दूसरा ट्रामा सेंटर परिसर में होगा। इससे वहां से मरीजों, तीमारदारों को गंतव्य तक पहुंचने में सहूलियत होगी। यहां पर स्टेशन बनने से भविष्य में डीरेका से कनेक्टिविटी करने में आसानी होगी।
दूसरे चरण में बेनिया बाग से हवेलिया तक बनने वाले मेट्रो लाइन को सारनाथ तक बढ़ाया जा रहा है। यहां भी डिपो के लिए जो आकाशवाणी की जमीन है वह मुफीद नहीं है। वहां भी सारनाथ और चौखंडी स्तूप के चलते एएसआई से अनुमति मिलने में दिक्कत है। इसके लिए दूसरी जगह तकरीबन 6 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी।
इसके लिए वीडीए के अधिकारियों के साथ राइट्स के अधिकारियों ने सारनाथ में संभावित जमीन की तलाश के लिए निरीक्षण किया। बैठक में लखनऊ मेट्रो के चीफ टाउन प्लानर रवि जैन, जीएम आलोक मिश्रा, प्रभात के अलावा वीडीए उपाध्यक्ष दिनेश सिंह, वीडीए सचिव एमपी सिंह रहे।