Varanasi News: वाराणसी में अस्सी-नगवां नाले से गंगा में गिरने वाले सीवर को जियोबैग शोधित कर रहा। ऐसे में जियोबैग के उपयोग से फीकल कोलीफॉर्म हजारों गुना तक कम हो जाते हैं।
अस्सी और नगवां नालों के जरिये गंगा में सीधे गिरने वाले सीवर को जियोबैग से शोधित किया जा रहा है। भगवानपुर एसटीपी बनने तक जियोबैग से होकर ही शोधित पानी गंगा में छोड़ा जाएगा। गंगा में शोधित पानी छोड़ने का काम जल निगम की ओर से किया जा रहा है।
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निगम के विशेषज्ञ एके सिंह ने बताया कि जियोबैग के उपयोग से फीकल कोलीफॉर्म हजारों गुना तक कम हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि नगवां के पंपिंग स्टेशन के पास जियोबैग के माध्यम से 40 से 50 एमएलडी सीवर शोधित किया जा रहा है।
पहले करीब दो लाख एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर फीकल कोलीफॉर्म गंगा में जाता था। अब जियोबैग से शोधित होने के बाद यह घटकर महज 230 एमपीएन प्रति 100 मिलीलीटर रह गया है।
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जियोबैग में एक विशेष प्रकार का रसायन और बैक्टीरिया होता है, जो सीवर के प्रदूषण को अपने में अवशोषित कर लेते हैं। बाद में बैग को साफ कर उसमें दोबारा रसायन और बैक्टीरिया भरा जाता है। जियोबैग में सीवर भरने के बाद वह फिल्टर होकर बाहर निकलता है।