फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रसूलन-गौहर जान के जमाने की वापसी

विज्ञापन
विज्ञापन
बनारसी ठुमरी में पुराने दौर की नाजोअदा की वापसी होने वाली है। संगीत जगत  की धरोहर बनीं बनारस घराने की मशहूर गायिकाओं रसूलन बाई, गौहर जान, हुस्ना और मोती बाई के कंठ से निकली बोल-बनाव और मान-मनुहार की ठुमरी से अब लोगों को परिचित कराने की तैयारी है।
विज्ञापन


यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में बनारस का नाम ‘संगीत के शहर’ के रूप में दर्ज होने के बाद ठुमरी के पुराने इतिहास को केंद्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा की मौजूदगी में दोहराया जाएगा। गायन की इस खास शैली को सहेजने के लिए दरबारी महफिलें लगाई जाएंगी। छह फरवरी को दरभंगा घाट पर ठुमरी गायकों के जमावड़े की तैयारी पूरी कर ली गई है।

‘सिटी ऑफ म्यूजिक’ के रूप में बनारस का नाम दर्ज होने के बाद पहली बार दरबारी महफिल की शुरुआत शहनाई के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की मानस पुत्री कही जाने वाली सोमा घोष करेंगी। संगीत नाटक अकादमी की सदस्य सचिव उषा आरके भी चाहती हैं कि पहले गायन के इतिहास को दोहराया जाए, ताकि विशिष्टताएं सामने आ सकें। सोमा के मुताबिक इसके लिए छह फरवरी को दरभंगा घाट के शाही पैलेस की बुकिंग हो चुकी है। महफिल में बनारस की गायिकाओं की ठुमरी यादगार बनेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें