बीते 20 अप्रैल को वाराणसी के मलदहिया स्थित रेशम फर्म कंपनी के प्रबंधक अंकित शुक्ला ने चेतगंज थाने में ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। ठगों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीम गठित की गई थी। तीनों टीमों ने आपसी समन्वय स्थापित रखते हुए सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों को ट्रेस किया। जिनमें से रोहन, पंकज और तरुण को मुंबई स्थित होटल ट्राइडेंट से गिरफ्तार किया। वहीं सचिन को गाजियाबाद के कौशांबी बस स्टैंड से दबोचा गया। सचिन के पास से ही एक करोड़ 87 लाख नकद बरामद हुए।
रेशम फर्म के मैनेजर से ऐसे की थी ठगी
बंगलूरू की एक रेशम फर्म का ऑफिस मलदहिया में है। अकथा चौराहा निवासी अंकित शुक्ला वहां मैनेजर है। उसी ऑफिस में अंकित का साला अश्वनी भी काम करता है। अंकित ने तहरीर में बताया था कि अश्वनी की मुलाकात कुछ दिन पूर्व अभिषेक और यश नाम के व्यक्तियों से हुई थी। दोनों ने अश्वनी को बताया था कि उनके अकाउंट संबंधी समस्याओं के समाधान की फर्म है और एक प्रतिशत कमीशन में हम टैक्स पर बड़ी भारी राहत दिलाते हैं।
चेतगंज थाने में ठगी के आरोपियों पर की गैंगस्टर की कार्यवाही
- फोटो : फाइल
जिस पर अश्वनी ने उन दोनों की मुलाकात हमसे करवाई और हमने दो करोड़ पर टैक्स की छूट की बात की थी। अंकित ने बताया कि इसके बाद अपने साले अश्वनी के साथ 20 अप्रैल को अभिषेक और यश के ऑफिस में पहुंचा तो वहां दो बाउंसर संदीप और सोनू भी मिले। अभिषेक और यश ने बताया कि संदीप और सोनू को पैसा गिनने के लिए बुलाया गया है।
इसके बाद पहले कमरे में अंकित, अश्वनी, यश और सोनू बैठ गए। इसी बीच पहले कमरे से सोनू और यश बाहर निकले। थोड़ी देर बाद अश्वनी ने देखा कि दूसरे कमरे में दो करोड़ रुपए के साथ ही अभिषेक भी नहीं था। इस पर अश्वनी और अंकित ने दौड़ा कर संदीप को पकड़ लिया और सूचना पुलिस को दी।
संदीप से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने दूसरे बाउंसर सोनू को भी पकड़ लिया। दोनों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वह दिल्ली से आए हुए बाउंसर हैं और उन्हें उनकी फर्म के द्वारा यहां भेजा गया था। तब पुलिस ने चेतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। वारदात के नौवें दिन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।