काशी विश्वनाथ गणपति महोत्सव की गणेश प्रतिमा के कलश को रविवार दोपहर पुलिस ने गंगा में विसर्जित करने से रोक दिया। उत्सव स्थल से विसर्जन के लिए कलश लेकर निकलते समय पहुंची पुलिस से पूजा समिति के लोगों से कहासुनी भी हो गई। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक उच्च न्यायालय का गंगा में विसर्जन फैसला नहीं आ जाएगा, तब तक वे कलश और प्रतिमा दोनों उत्सव स्थल पर ही सुरक्षित रखेंगे।
सात दिवसीय गणेशोत्सव की पूर्णाहुति के बाद रविवार दोपहर शहर में विसर्जन शोभायात्राएं निकाली जा रही थीं। मछोदरी स्थित काशी विद्या मंदिर परिसर में प्रतिष्ठापित काशी विश्वनाथ गणपति महोत्सव की गणेश प्रतिमा की वैदिक मंत्रोच्चार से पूजा कर पूर्णाहुति की गई। इसके बाद प्रतिमा के समक्ष रखे कलश के विसर्जन के लिए निकालने जा रहे थे कि वहां कोतवाली पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने समिति के पदाधिकारियों को हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी दशा में कलश विसर्जन गंगा में नहीं किया जा सकता। इसे निर्धारित कुंडों में ही विसर्जित करना होगा।
समिति के संरक्षक रामचरण का कहना था कि पिछले वर्ष प्रतिमा उत्सव स्थल पर ही रख ली गई थी लेकिन कलश गंगा में ही विसर्जित किया गया था। इस पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। इस पर दरोगा ने एसडीएम से फोन पर उनकी बात कराई। एसडीएम ने भी गंगा में विसर्जन के मसले पर हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद पूजा समिति के पदाधिकारियों ने कुंड में विसर्जन से इनकार कर दिया और कलश को यथावत रखवा दिया।